द्या तोहका भी दीन्ह जाइ। उ पचे तोहरे झोरी मँ पूरा नाप दबाइ दबाइ के, हलाइके बाहेर निकसत भइ उड़ेरिहीं काहेकि जउने नापे स तू दूसरन क नापत ह, उहइ स तोहका नापा जाइ।”
[6] कउनउ बाते क चिन्ता न करा, बल्कि सब परिस्थितियन मँ धन्यबाद सहित पराथना अउर बिनय क साथे आपन याचना परमेस्सर क सामने रखत जा। [7] इही स परमेस्सर कइँती स मिलइवाली सान्ति, जउन समझ स परे बा तोहरे हिरदइ अउर तोहरे बुद्धि क मसीह ईसू मँ सुरच्छित बनाए रखी।
परमेस्सर अपने इच्छा स सत्य क बचन दुआरा हमे जनम दिहेस जेहसे हम ओकरे द्वारा रचे गएन प्रानियन मँ सबसे महत्वपूर्ण सिद्ध होइ सकी।
[7] “किन्तु जउन मनई यहोवा मँ बिस्सास करत ह, उ धन्य अहइ। सिरिफ यहोवा ही ओका बिस्सास होइहीं। [8] उ मनई उ बृच्छ क तरह होइ जउन पानी क पास लगावा गवा होइ। उ बृच्छ क लम्बी जउन होत हीं जउन पानी पावत हीं। उ बृच्छ गर्मी क दिनन स नाहीं डरत। ऍकर पातियन सदा हरी रहत हीं। इ बरिस क ओन दिनन मँ परेसान नाहीं होत जब बर्खा नाहीं होत। उ बृच्छ मँ सदा फल आवत हीं।
तू चिन्ता जिन करा, मइँ तोहरे संग हउँ। तू भयभीत जिन ह्वा, मइँ तोहार परमेस्सर हउँ। मइँ तोहका सुदृढ़ करब। मइँ तोहका आपन नेकी क दाहिने हाथे स सहारा देब।
ओकरी करूणा अउर सच्चाई क पूर्णता स हमका सबेन्क तमाम अनुग्रह पर अनुग्रह मिला।
[16] सरगदूत कहेस, “तू मोरे बरे आपन पूत क मारइ बरे तइयार रह्या। इ तोहार इकलौता पूत रहा। तू मोरे बरे अइसा किहा ह ऍह बरे मइँ, यहोवा तोहका वचन देत अहउँ कि [17] मइँ तोहका सचमुच ही असीसब। मइँ तोहका ओतना ही संतानन देब जेतना अकासे मँ तारा बाटइँ। इ सबइ ऍतना जियादा लोग होइहीं जेतना समुद्दर क किनारे बालू क कण अउ तोहार लोग आपन सबहि दुस्मनन क हरइहीं।
[28] यहोवा तोहका बहोत बर्ख देइ। जेसे तोहका बहोत फसिल अउ दाखरस मिलइ। [29] सब लोग तोहार सेवा करइँ। रास्ट्र तोहरे समन्वा निहुरइ। तू आपन भाई लोगन क ऊपर राज्ज करब्या। तोहरी महतारी क पूत तोहरे समन्वा निहुरिही अउ तोहार हुकुम मनिही। हर एक मनई जउन तोहका सरापी, सराप पाइ अउ हर एक मनई जउन तोहका आसीर्बाद देइ, आसीर्बाद पाइ।”
[1] उ मनई सचमुच धन्य होइ जउन दुस्टन क सलाह न मानी, अउर पापियन क संग सामिल नाहीं होत ह अउर ओनकर संग नाहीं रहत ह जउन परमेस्सर क बरे सम्मान नाहीं दिखावत ह। [2] उ नीक मनई अहइ जउन यहोवा क उपदेसन स पिरेम राखत ह। उ तउ दिन रात ओन उपदेसन क मनन करत ह। [3] एहसे उ मनई उ बृच्छ जइसा मजबूत बनत ह जेका सिंचाई क नहर क किनारे रोपा गवा ह। उ उ बृच्छ क नाई बाटइ, जउन छेत्र मँ फल देत ह अउ जेकर पत्ता कबहुँ नाहीं मुरझातेन। उ जउन भी करत ह सफल ही होत ह।
[1] यहोवा मोर गड़रिया अहइ। जउन कछू भी मोका अपेच्छित होइ, सदा मोरे लगे रही। [2] हरे भरे चरागाह मँ मोका सुख स उ राखत ह। उ मोका सांत झरनन पइ लइ जात ह। [3] उ आपन नाउँ क निमित्त मोरी आतिमा क नई सक्ती देत ह। उ मोर अगुआई करत ह कि उ फुरइ उत्तिम अहइ। [4] मइँ मउत क अँधिअर घाटी स गुजरत भइ नाहीं डेराब, काहेकि यहोवा तू मोरे संग अहा। तोहार चरवाहे क लाठी मोका सुख देत हीं।