जे केओ अहाँ सँ किछु मँगैत अछि तकरा दिऔक, आ जे केओ अहाँ सँ पैंच लेबऽ चाहैत अछि तकरा सँ मुँह नहि घुमाउ।
परमेश्वर पिताक दृष्टि मे शुद्ध आ असली धर्म यैह अछि—विपत्ति मे पड़ल अनाथ और विधवा सभक सहायता कयनाइ और अपना केँ संसारक अशुद्धता सँ बँचा कऽ रखनाइ।
जँ ककरो संसारक सम्पत्ति छैक, और ओ अपना भाय केँ आवश्यकता मे देखैत छैक, मुदा ओकरा प्रति अपन हृदय कठोर कऽ लैत अछि, तँ ओकरा मे परमेश्वरक प्रेम कोना रहि सकैत छैक?
[31] “मनुष्य-पुत्र अपन सभ स्वर्गदूतक संग जहिया अपना महिमा मे औताह, तहिया ओ अपन महिमामय सिंहासन पर बैसताह। [32] पृथ्वी परक सभ जातिक लोक हुनका समक्ष जमा कयल जायत, आ जहिना चरबाह भेँड़ा सभ केँ बकरी सभ सँ छुटिअबैत अछि, तहिना ओ लोक सभ केँ एक-दोसर सँ अलग करताह। [33] ओ ‘भेँड़ा’ सभ केँ अपन दहिना कात आ ‘बकरी’ सभ केँ अपन बामा कात ठाढ़ करताह। [34] “तकरबाद राजा अपन दहिना कात ठाढ़ भेल लोक सभ केँ कहथिन, ‘हे हमर पिताक कृपापात्र सभ! आउ, ओहि राज्यक अधिकारी बनू, जकरा सृष्टिक आरम्भ सँ अहाँ सभक लेल तैयार कयल गेल अछि। [35] कारण, हम भूखल छलहुँ आ अहाँ सभ हमरा भोजन करौलहुँ। हम पियासल छलहुँ आ अहाँ सभ हमरा पानि पिऔलहुँ। हम परदेशी छलहुँ आ अहाँ सभ अपना घर मे हमर सेवा-सत्कार कयलहुँ। [36] हम नाङट छलहुँ आ अहाँ सभ हमरा वस्त्र पहिरौलहुँ। हम बिमार छलहुँ आ अहाँ सभ हमर रेख-देख कयलहुँ। हम जहल मे छलहुँ आ अहाँ सभ हमरा सँ भेँट करबाक लेल अयलहुँ।’ [37] “ताहि पर ओ धर्मी लोक सभ हुनका कहथिन, ‘यौ प्रभु, हम सभ अहाँ केँ कहिया भूखल देखलहुँ आ भोजन करौलहुँ, पियासल देखलहुँ आ पानि पिऔलहुँ? [38] हम सभ अहाँ केँ कहिया परदेशी देखलहुँ आ अपना घर मे सेवा-सत्कार कयलहुँ, नाङट देखलहुँ आ वस्त्र पहिरौलहुँ? [39] कहिया हम सभ अहाँ केँ बिमार वा जहल मे देखलहुँ आ अहाँ सँ भेँट करबाक लेल गेलहुँ?’ [40] एहि पर राजा हुनका सभ केँ उत्तर देथिन, ‘हम अहाँ सभ केँ सत्य कहैत छी जे, जे किछु अहाँ सभ हमर एहि भाय सभ मे सँ ककरो लेल, छोटो सँ छोटक लेल कयलहुँ, से हमरा लेल कयलहुँ।’ [41] “तकरबाद राजा अपन बामा कात ठाढ़ लोक सभ केँ कहथिन, ‘हे सरापित लोक सभ! तोँ सभ हमरा लग सँ दूर हटि जाह और कहियो नहि मिझाय वला ओहि आगिक कुण्ड मे पड़ल रहह, जे शैतान आ ओकर दूत सभक लेल तैयार कयल गेल अछि। [42] कारण, हम भूखल छलहुँ आ तोँ सभ हमरा खयबाक लेल किछु नहि देलह, पियासल छलहुँ आ तोँ सभ पानि नहि पिऔलह। [43] हम परदेशी छलहुँ आ तोँ सभ अपना ओतऽ हमर स्वागत नहि कयलह, नाङट छलहुँ आ वस्त्र नहि पहिरौलह। हम बिमार छलहुँ, जहल मे छलहुँ, मुदा तोँ सभ हमरा देखबाक लेल नहि अयलह।’ [44] “एहि पर ओहो सभ पुछतनि जे, ‘यौ प्रभु, हम सभ अहाँ केँ कहिया भूखल, पियासल, परदेशी, नाङट, बिमार वा जहल मे बन्द देखलहुँ आ अहाँक सेवा नहि कयलहुँ?’ [45] ताहि पर राजा ओकरा सभ केँ उत्तर देथिन, ‘हम तोरा सभ केँ सत्य कहैत छिअह जे, जे किछु तोँ सभ हमर एहि भाय सभ मे सँ ककरो लेल, छोटो सँ छोटक लेल नहि कयलह से हमरो लेल नहि कयलह।’ ” [46] तखन यीशु कहलनि, “ई सभ अनन्त दण्ड भोगबाक लेल चल जायत, मुदा धर्मी सभ अनन्त जीवन मे प्रवेश करत।”
हम अपन सभ काज मे अहाँ सभ केँ देखा देलहुँ जे कोना एहि तरहक परिश्रम कऽ कऽ अपना सभ केँ निर्बल सभक सहयोग करबाक अछि, आ प्रभु यीशुक कहल बात केँ मोन रखबाक अछि जे ओ अपने बाजल छलाह, ‘लेबऽ सँ देबऽ मे आशिष अछि।’ ”
कर असूल करऽ वला सभ सेहो बपतिस्मा लेबऽ आयल आ यूहन्ना सँ पुछलकनि, “यौ गुरुजी, हम सभ की करू?”
जे चोरी करैत अछि, से आब चोरी नहि करओ, बल्कि अपना हाथ सँ इमानदारीपूर्बक परिश्रम करओ, जाहि सँ ओ आवश्यकता मे पड़ल लोक सभक मदति कऽ सकय।
[17] जँ ककरो संसारक सम्पत्ति छैक, और ओ अपना भाय केँ आवश्यकता मे देखैत छैक, मुदा ओकरा प्रति अपन हृदय कठोर कऽ लैत अछि, तँ ओकरा मे परमेश्वरक प्रेम कोना रहि सकैत छैक? [18] प्रिय बौआ सभ, अपना सभ खाली शब्द वा बात द्वारा प्रेम नहि करी, बल्कि शुद्ध मोन सँ और काज द्वारा करी।
एहि पर राजा हुनका सभ केँ उत्तर देथिन, ‘हम अहाँ सभ केँ सत्य कहैत छी जे, जे किछु अहाँ सभ हमर एहि भाय सभ मे सँ ककरो लेल, छोटो सँ छोटक लेल कयलहुँ, से हमरा लेल कयलहुँ।’
एक दोसराक भार उठाउ। एहि तरहेँ अहाँ सभ मसीहक नियम पूरा करब।
आ तकरा संग अहाँ सभ भलाइक काज कयनाइ आ अपन चीज-वस्तु सँ दोसराक सहायता कयनाइ नहि बिसरू, कारण एहन बलिदान सँ परमेश्वर प्रसन्न होइत छथि।
परमेश्वरक लोक सभ केँ जाहि बातक आवश्यकता होनि ताहि मे हुनकर सहायता करिऔन। अतिथि-सत्कार करऽ मे तत्पर रहू।
[10] ओ उत्तर देलथिन, “जकरा दूटा कुर्ता होइक से एकटा तकरा देअओ जकरा नहि छैक, और जकरा लग भोजनक वस्तु होइक सेहो एहिना करओ।” [11] कर असूल करऽ वला सभ सेहो बपतिस्मा लेबऽ आयल आ यूहन्ना सँ पुछलकनि, “यौ गुरुजी, हम सभ की करू?”
Maithili Bible 2010
2010 The Bible Society of India and Wycliffe Bible Translators, Inc