एक विषय पर बाइबिल के श्लोक

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अतिरिक्त: [गुलामी]
की अहाँ बजाओल जयबाक समय मे ककरो गुलाम छलहुँ? कोनो चिन्‍ता नहि करू—ओना तँ जँ स्‍वतन्‍त्र भेनाइ सम्‍भव भऽ जाय तँ अवसर सँ फायदा लिअ।
[16] सभ मनुष्‍यक आदर करू, विश्‍वासी भाय सभ सँ प्रेम राखू, परमेश्‍वरक भय मानू, आ राजाक सम्‍मान करू। [17] हे दास सभ, आदरपूर्बक अपन मालिक सभक अधीन रहू, मात्र तिनका सभक अधीन नहि, जे सभ दयालु आ नम्र छथि, बल्‍कि तिनको सभक, जे सभ कठोर छथि। [18] किएक तँ जँ केओ ई बात मोन मे रखने रहैत अछि जे, हमरा परमेश्‍वरक इच्‍छाक अनुसार अपन जीवन व्‍यतीत करबाक अछि, आ तखन दुःख उठबैत अन्‍याय केँ धैर्यपूर्बक सहैत अछि, तँ से प्रशंसा वला बात अछि।
परस्‍त्रीगमन कयनिहार और समलैंगिक सम्‍बन्‍ध रखनिहार लोक, मनुष्‍य केँ किनऽ-बेचऽ वला, झूठ बाजऽ वला और झूठ गवाही देबऽ वला, और ओहि सभ लोकक लेल अछि जे सभ आरो-आरो तेहन कोनो काज सभ करैत अछि जे सही सिद्धान्‍तक विपरीत अछि।
दासत्‍वक जुआ तर मे जे लोक सभ अछि से सभ अपन मालिक केँ पूर्ण आदरक योग्‍य बुझय, जाहि सँ परमेश्‍वरक नाम आ अपना सभक शिक्षाक निन्‍दा नहि होअय।
यौ दास सभ, एहि संसार मे जे अहाँ सभक मालिक छथि, सभ बात मे तिनकर आज्ञा मानू। मालिक केँ खुश करबाक उद्देश्‍य सँ, जखन ओ देखिते छथि तखने मात्र नहि, बल्‍कि शुद्ध मोन सँ और प्रभु पर श्रद्धा राखि कऽ आज्ञा मानू।
यौ मालिक लोकनि, अहाँ सभ ई बात जनैत जे स्‍वर्ग मे अहूँ सभक एक मालिक छथि, अपन दास सभक संग न्‍यायपूर्ण आ उचित व्‍यवहार करू।
[5] यौ दास सभ! अहाँ सभ जहिना मसीहक सेवा करितहुँ तहिना निष्‍कपट मोन सँ भय आ आदरक संग तिनका सभक आज्ञा मानू जे सभ एहि संसार मे अहाँ सभक मालिक छथि। [6] मालिक केँ खुश करबाक उद्देश्‍य सँ, जखन ओ देखैत छथि तखने मात्र अपन काज नहि करू, बल्‍कि पूरा मोन सँ परमेश्‍वरक इच्‍छा पूरा करैत अपना केँ मसीहेक दास बुझि कऽ करू। [7] अपन सेवा-काज खुशी मोन सँ करू, ई बुझैत जे मनुष्‍यक लेल नहि, बल्‍कि प्रभुक लेल करैत छी, [8] कारण, अहाँ सभ तँ जनिते छी जे प्रत्‍येक व्‍यक्‍ति, ओ चाहे दास होअय वा स्‍वतन्‍त्र, ओ जे कोनो नीक काज करत, तकर प्रतिफल प्रभु सँ पाओत। [9] आब अहाँ सभ, जे मालिक छी, अहूँ सभ उचिते व्‍यवहार अपन दास सभक संग करू। डेरौनाइ-धमकौनाइ छोड़ि दिअ, एहि बातक मोन रखैत जे स्‍वर्ग मे ओकरा सभक आ अहाँ सभक एके मालिक छथि, और ओ ककरो संग पक्षपात नहि करैत छथि।
आब ने केओ यहूदी अछि आ ने यूनानी, ने गुलाम अछि ने स्‍वतन्‍त्र, ने पुरुष अछि ने स्‍त्रीगण, किएक तँ अहाँ सभ मसीह यीशु मे एक छी।
स्‍वतन्‍त्रे बनल रहबाक लेल मसीह अपना सभ केँ स्‍वतन्‍त्र कयने छथि, तेँ दृढ़ रहू आ गुलामीक जुआ मे अपना केँ फेर नहि जोतऽ दिअ।
“प्रभुक आत्‍मा हमरा पर छथि; किएक तँ ओ गरीब सभ केँ शुभ समाचार सुनयबाक लेल हमर अभिषेक कयने छथि। ओ हमरा पठौलनि अछि जे हम कैदी सभक लेल मुक्‍तिक घोषणा करी, आन्‍हर सभ केँ कहिऐक जे, ‘तोँ सभ आब देखि सकैत छह,’ सताओल लोक सभ केँ छुटकारा दिआबी
आब गुलामक रूप मे नहि, बल्‍कि गुलाम सँ बहुत बढ़ि कऽ—प्रिय भायक रूप मे। ओ हमरा लेल अत्‍यन्‍त प्रिय अछि, मुदा अहाँक लेल एहू सँ प्रिय—एक मनुष्‍यक रूप मे और प्रभु मे भायक रूप मे!
[9] गुलाम सभ केँ सिखबिऔक जे ओ सभ प्रत्‍येक बात मे अपन मालिकक अधीन रहय, मालिक केँ प्रसन्‍न राखय आ बिनु मुँह लगबैत अपन मालिकक आज्ञाक पालन करय, [10] चोरी-चपाटी नहि करय, बल्‍कि स्‍पष्‍ट सँ देखाबय जे ओ पूर्ण रूप सँ इमानदार अछि जाहि सँ सभ बात मे ओ सभ अपना सभक उद्धारकर्ता-परमेश्‍वरक शिक्षाक शोभा बढ़बय।
[47] “ओ सेवक जे अपन मालिकक इच्‍छा तँ जनैत अछि मुदा तकरा पूरा करबाक लेल किछु नहि करैत अछि, से बहुत मारि खायत। [48] मुदा जे नहि जनैत अछि आ तखन मारि खाय जोगरक काज करैत अछि, से कम मारि खायत। जकरा बहुत देल गेल छैक, तकरा सँ बहुत माँगलो जयतैक, आ जतेक आओर बेसी ककरो देल गेल छैक, ततेक आओर फेर ओकरा घुमाबऽ पड़तैक।
[1] दासत्‍वक जुआ तर मे जे लोक सभ अछि से सभ अपन मालिक केँ पूर्ण आदरक योग्‍य बुझय, जाहि सँ परमेश्‍वरक नाम आ अपना सभक शिक्षाक निन्‍दा नहि होअय। [2] जाहि दासक मालिक प्रभु यीशु पर विश्‍वास कयनिहार छथि, से एहि कारणेँ अपन मालिकक कम आदर नहि करनि जे, ई मालिक तँ विश्‍वासक दृष्‍टिएँ हमर भाये अछि, बल्‍कि ओहि मालिक केँ आओर बढ़ियाँ सँ सेवा करनि, कारण, जाहि आदमी केँ ओकर सेवा सँ लाभ भऽ रहल अछि, से विश्‍वासी आ ओकर प्रिय भाय छथि। अहाँ विश्‍वासी सभ केँ एहि बात सभक शिक्षा दैत रहिऔक, आ ओकरा सभ सँ आग्रह करैत रहू जे एहि आज्ञा सभक पालन करओ।
[5] यौ दास सभ! अहाँ सभ जहिना मसीहक सेवा करितहुँ तहिना निष्‍कपट मोन सँ भय आ आदरक संग तिनका सभक आज्ञा मानू जे सभ एहि संसार मे अहाँ सभक मालिक छथि। [6] मालिक केँ खुश करबाक उद्देश्‍य सँ, जखन ओ देखैत छथि तखने मात्र अपन काज नहि करू, बल्‍कि पूरा मोन सँ परमेश्‍वरक इच्‍छा पूरा करैत अपना केँ मसीहेक दास बुझि कऽ करू। [7] अपन सेवा-काज खुशी मोन सँ करू, ई बुझैत जे मनुष्‍यक लेल नहि, बल्‍कि प्रभुक लेल करैत छी, [8] कारण, अहाँ सभ तँ जनिते छी जे प्रत्‍येक व्‍यक्‍ति, ओ चाहे दास होअय वा स्‍वतन्‍त्र, ओ जे कोनो नीक काज करत, तकर प्रतिफल प्रभु सँ पाओत। [9] आब अहाँ सभ, जे मालिक छी, अहूँ सभ उचिते व्‍यवहार अपन दास सभक संग करू। डेरौनाइ-धमकौनाइ छोड़ि दिअ, एहि बातक मोन रखैत जे स्‍वर्ग मे ओकरा सभक आ अहाँ सभक एके मालिक छथि, और ओ ककरो संग पक्षपात नहि करैत छथि।
Maithili Bible 2010
2010 The Bible Society of India and Wycliffe Bible Translators, Inc