किएक तँ पापक मजदूरी अछि मृत्यु, मुदा परमेश्वरक वरदान अछि अनन्त जीवन जे अपना सभक प्रभु, मसीह यीशुक माध्यम सँ प्राप्त होइत अछि।
हम जँ मृत्युदण्डक योग्य कोनो अपराध कयने होइ तँ मरबाक लेल हम एकदम तैयार छी। मुदा जँ हिनका सभक द्वारा लगाओल अभियोग मे किछु सत्ये नहि अछि तँ हमरा हिनका सभक हाथ सौंपबाक अधिकार किनको नहि छनि। हम सम्राट लग अपील करैत छी!”
मुदा डरपोक सभक, अविश्वासी सभक, घृणित लोकक, हत्यारा सभक, अनैतिक शारीरिक सम्बन्ध राखऽ वला सभक, जादू-टोना कयनिहार सभक, मुरुतक पूजा कयनिहार सभक आ सभ झूठ बजनिहारक स्थान ओहि आगिक कुण्ड मे होयतैक जे गन्धक सँ धधकैत रहैत अछि। यैह अछि दोसर मृत्यु।”
[1] प्रत्येक व्यक्ति शासन कयनिहार अधिकारी सभक अधीन रहओ। किएक तँ कोनो अधिकार एहन नहि अछि जे परमेश्वर द्वारा स्थापित नहि कयल गेल होअय—जे सभ शासन कऽ रहल छथि, तिनकर सभक अधिकार परमेश्वर सँ भेटल छनि। [2] एहि लेल, जे केओ शासनक विरोध करैत अछि से तकर विरोध करैत अछि जे परमेश्वर स्थापित कयने छथि, आ अपना पर दण्डक आज्ञा केँ बजबैत अछि। [3] कारण, अधिकारी सभ उचित काज कयनिहार सभक लेल नहि, बल्कि गलत काज कयनिहार सभक लेल भय उत्पन्न करैत छथि। की अहाँ अधिकारी सँ निर्भय रहऽ चाहैत छी? तखन उचित काज करैत रहू आ ओ अहाँक प्रशंसा करताह। [4] किएक तँ ओ अहाँक कल्याण करबाक लेल परमेश्वरक सेवक छथि। मुदा जँ अहाँ गलत काज करैत छी तँ हुनका सँ अवश्य भयभीत होउ, कारण, दण्ड देबाक अधिकार हुनका व्यर्थे नहि छनि। ओ परमेश्वरक सेवक छथि आ गलत काज कयनिहार लोक केँ परमेश्वरक इच्छाक अनुसार दण्ड दैत छथि। [5] तेँ अधिकारी सभक अधीन रहनाइ आवश्यक अछि—मात्र दण्ड सँ बचबाक लेल नहि, बल्कि अपना विवेकक समक्ष निर्दोष रहबाक लेल सेहो। [6] एही कारण सँ अहाँ सभ राजकर सेहो चुकबैत छी, किएक तँ अधिकारी सभ परमेश्वरक सेवक छथि आ अपन कर्तव्य पूरा करऽ मे लागल रहैत छथि। [7] अहाँ सभ सेहो सभक प्रति अपन कर्तव्य पूरा करू—जिनका राजकर देबाक अछि, तिनका राजकर दिऔन; जिनका सीमा-कर देबाक अछि, तिनका सीमा-कर दिऔन; जिनकर भय मानबाक अछि तिनकर भय मानू आ जिनकर आदर करबाक अछि तिनकर आदर करू।
[3] धर्मशिक्षक और फरिसी सभ एक स्त्रीगण केँ अनलनि, जे पुरुषक संग कुकर्म करैत पकड़ा गेल छल, और लोकक बीच मे ओकरा ठाढ़ कऽ कऽ [4] यीशु केँ कहलथिन, “गुरुजी, ई स्त्रीगण पुरुषक संग कुकर्म करिते मे पकड़ा गेल। [5] धर्म-नियम मे मूसा हमरा सभ केँ आज्ञा देलनि जे एहन स्त्रीगण केँ पाथर मारि कऽ मारि देबाक चाही। आब अहाँ की कहैत छी?” [6] ई बात ओ सभ हुनका फँसाबऽ लेल पुछलनि, जाहि सँ हुनका पर दोष लगयबाक आधार भेटनि। यीशु नीचाँ झुकि कऽ अपन आङुर सँ जमीन पर लिखऽ लगलाह। [7] ओ सभ जखन हुनका सँ पुछिते रहलाह, तखन ओ मूड़ी उठा कऽ हुनका सभ केँ कहलथिन, “अहाँ सभ मे सँ जे निष्पाप होथि, वैह सभ सँ पहिने पाथर मारथि।” [8] और फेर झुकि कऽ जमीन पर लिखऽ लगलाह। [9] ई बात जखन ओ सभ सुनलनि तँ पहिने बूढ़ सभ आ तखन एक-एक कऽ सभ केओ चल गेलाह। आब मात्र यीशु रहि गेलाह, और ओ स्त्रीगण जे ओहिठाम ठाढ़ छलि। [10] यीशु मूड़ी उठा कऽ ओकरा कहलथिन, “बहिन, ओ सभ कतऽ अछि? की तोरा केओ नहि दण्ड देलकह?” [11] ओ बाजल, “नहि, मालिक, केओ नहि।” यीशु बजलाह, “हमहूँ तोरा दण्ड नहि दैत छिअह। आब जाह, आ फेर पाप नहि करह।”]
“ई नहि सोचू जे हम मूसा द्वारा देल धर्म-नियम अथवा परमेश्वरक प्रवक्ता सभक लेख सभ केँ रद्द करबाक लेल आयल छी। हम ओहि सभ केँ रद्द नहि, बल्कि पूरा करबाक लेल आयल छी।
[38] “अहाँ सभ सुनने छी जे एना कहल गेल छल, ‘केओ जँ ककरो आँखि फोड़य तँ ओकरो आँखि फोड़ल जाय, आ केओ जँ ककरो दाँत तोड़य तँ ओकरो दाँत तोड़ल जाय।’ [39] मुदा हम अहाँ सभ केँ कहैत छी, जँ कोनो दुष्ट लोक अहाँ केँ किछु करओ, तँ ओकर विरोध नहि करू। केओ जँ अहाँक दहिना गाल पर थप्पड़ मारय तँ ओकरा सामने दोसरो गाल कऽ दिऔक।