किएक तँ हुनके माध्यम सँ सभ वस्तुक सृष्टि भेल, ओ चाहे स्वर्गक होअय वा पृथ्वीक, दृश्य होअय वा अदृश्य, सिंहासन होअय वा प्रभुता, शासन होअय वा अधिकार—सभ वस्तु हुनके द्वारा आ हुनके लेल रचल गेल अछि।
[35] ओ सभ फेर मरि नहि सकैत अछि, ओ सभ तँ एहि विषय मे स्वर्गदूत सभ जकाँ अछि, और जीबि उठलाक कारणेँ ओ सभ परमेश्वरक सन्तान अछि। [36] मुदा मुइल सभ जीबि उठैत अछि वा नहि, ताहि प्रश्नक सम्बन्ध मे मूसा जरैत झाड़ीक विवरण मे स्पष्ट कयलनि जे अवश्य जीबि उठैत अछि, कारण ओ प्रभु केँ ‘अब्राहमक परमेश्वर, इसहाकक परमेश्वर और याकूबक परमेश्वर’ कहने छथि।
एहि चारू प्राणी मे प्रत्येक केँ छओ-छओटा पाँखि छल। ओकरा सभक सम्पूर्ण शरीर मे आ पाँखिक तर मे सेहो आँखिए-आँखि छल। ओ सभ दिन-राति बिनु अटकि कऽ ई कहैत रहैत अछि, “सर्वशक्तिमान प्रभु-परमेश्वर, पवित्र, पवित्र, पवित्र छथि। ओ वैह छथि, जे छलाह, जे छथि आ जे आबहो वला समय मे रहताह।”
जीबि उठाओल गेला पर लोक सभ ने विवाह करत आ ने विवाह मे देल जायत, बल्कि ओ सभ स्वर्गदूत सभ जकाँ होयत।
हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, एही तरहेँ एकोटा पापी जे अपना पापक लेल पश्चात्ताप कऽ हृदय-परिवर्तन करैत अछि, तकरा लेल परमेश्वरक स्वर्गदूत सभ आनन्द मनबैत छथि।”
तकरबाद हम एक आओर स्वर्गदूत केँ आकाशक बीच मे उड़ैत देखलियनि। हुनका लग पृथ्वी पर रहनिहार प्रत्येक जाति, कुल, भाषा आ राष्ट्रक लोक सभ केँ सुनयबाक लेल अनन्त काल तक रहऽ वला सनातन शुभ समाचार छलनि।
स्वर्गदूतो वला बात केँ मोन पाड़ू—स्वर्गदूत सभ मे सँ जे सभ अपन अधिकारक पद नहि राखि अपन वास स्थान छोड़ि देलक, तकरा सभ केँ परमेश्वर भीषण न्याय-दिनक न्यायक लेल कहियो नहि खुलऽ वला बन्हन मे बान्हि कऽ अन्हार मे राखि देलथिन।
[21] कारण, यीशु मसीह जीबि उठि कऽ स्वर्ग मे प्रवेश कयलनि आ आब परमेश्वरक दहिना कात विराजमान छथि। सभ स्वर्गदूत, अधिकारी आ शक्ति सभ हुनके अधीन मे अछि। [22] मसीह अपना शरीर मे दुःख भोगलनि। एहि लेल अहूँ सभ शस्त्र जकाँ ओही मनोभावना केँ धारण करू जे हुनका मे छलनि, किएक तँ जे केओ अपना शरीर मे दुःख भोगने अछि, से पाप सँ सम्बन्ध तोड़ि लेने अछि,
तखन हुनका सभ केँ ई स्पष्ट कयल गेलनि जे, जाहि बात सभक भविष्यवाणी ओ सभ सुना रहल छलाह, से हुनका सभक अपन हितक लेल नहि, बल्कि अहाँ सभक हितक लेल अछि। कारण, ओ सभ जाहि बात सभक भविष्यवाणी कयलनि, सैह बात सभ आब अहाँ सभ केँ सुनाओल गेल अछि। ओ अहाँ सभ केँ तिनका सभ द्वारा सुनाओल गेल जे सभ स्वर्ग सँ पठाओल पवित्र आत्माक प्रेरणा सँ अहाँ सभक बीच शुभ समाचारक प्रचार कयलनि। ई बात सभ बुझबाक लेल स्वर्गदूतो सभ लालायित रहैत छथि।
अहाँ सभ ओतऽ नहि, बल्कि सियोन नामक पहाड़ जे स्वर्गिक यरूशलेम अछि, अर्थात् जीवित परमेश्वरक नगर लग आयल छी, जतऽ खुशीक उत्सव मनाबऽ वला लाखो-लाख स्वर्गदूतक सम्मेलन अछि।
[11] फेर हम देखलहुँ, तँ बहुतो स्वर्गदूत सभक आवाज सुनाइ देलक जे सभ सिंहासन, चारू प्राणी आ धर्मवृद्ध सभक चारू कात ठाढ़ छलाह, जिनकर संख्या लाखो-लाख आ करोड़ो-करोड़ मे छलनि। [12] ओ सभ जोर सँ बाजि रहल छलाह जे, “वध कयल गेल बलि-भेँड़ा सामर्थ्य, धन, बुद्धि, शक्ति, आदर, महिमा आ स्तुति पयबाक योग्य छथि!”
[6] “जँ तोँ परमेश्वरक पुत्र छह तँ एतऽ सँ नीचाँ कुदि जाह। कारण, धर्मशास्त्र मे लिखल अछि जे, ‘परमेश्वर तोरा लेल स्वर्गदूत सभ केँ आज्ञा देथिन और ओ सभ अपना कोरा मे तोरा लोकि लेथुन, जाहि सँ पयर मे पाथर सँ चोट नहि लगतह।’ ” [7] यीशु ओकरा कहलथिन, “इहो लिखल अछि जे, ‘अपन प्रभु-परमेश्वरक जाँच नहि करहुन।’ ” [8] तखन शैतान हुनका बहुत ऊँच पहाड़ पर लऽ गेलनि और ओतऽ सँ संसारक सभ राज्य आ ओकर वैभव देखबैत [9] हुनका कहलकनि, “जँ तोँ हमरा सामने निहुरबह आ हमर उपासना करबह तँ हम ई सभ तोरा दऽ देबह।” [10] यीशु ओकरा कहलथिन, “हे शैतान, हमरा सोझाँ सँ दूर हो! कारण, धर्मशास्त्र मे ई लिखल अछि जे, ‘अपना प्रभु-परमेश्वरक उपासना करहुन, और मात्र हुनके सेवा करहुन।’ ” [11] तकरबाद शैतान यीशु लग सँ चल गेल, और स्वर्गदूत सभ आबि कऽ हुनकर सेवा करऽ लगलथिन।
किएक तँ मनुष्य-पुत्र अपन स्वर्गदूत सभक संग अपना पिताक महिमा मे आओत, तखन ओ प्रत्येक मनुष्य केँ ओकर काजक अनुसार प्रतिफल देतैक।
“अहाँ सभ एहि पर ध्यान राखू जे एहि बच्चा सभ मे सँ एकोटा केँ तुच्छ नहि बुझब। हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, स्वर्ग मे एकर सभक रक्षा कयनिहार दूत सभ सदिखन हमर स्वर्गीय पिताक मुँह दिस तकैत रहैत छथि।
[31] धुतहूक पैघ आवाजक संग ओ अपन स्वर्गदूत सभ केँ चारू दिस पठौताह आ ओ सभ आकाश आ पृथ्वीक अन्तिम सीमा तक जा कऽ हुनकर चुनल लोक सभ केँ जमा करताह। [32] “आब अंजीरक गाछ सँ एकटा बात सिखू। जखन ओकर ठाढ़ि कोमल होमऽ लगैत छैक आ ओहि मे नव पात निकलऽ लगैत छैक तँ अहाँ सभ बुझि जाइत छी जे गर्मीक समय आबि रहल अछि। [33] तहिना जखन अहाँ सभ ई सभ बात होइत देखब तँ बुझि लिअ जे समय लगचिआ गेल, हँ, ई बुझू जे ओ घरक मुँह पर आबि गेल अछि। [34] हम अहाँ सभ केँ सत्य कहैत छी जे एहि पीढ़ी केँ समाप्त होमऽ सँ पहिने ई सभ घटना निश्चित घटत। [35] आकाश और पृथ्वी समाप्त भऽ जायत, मुदा हमर वचन अनन्त काल तक रहत।
कारण धर्मशास्त्र मे लिखल अछि जे, ‘परमेश्वर तोहर रक्षा करबाक लेल स्वर्गदूत सभ केँ आज्ञा देथिन,
[11] मुदा मरियम कबरक बाहर कनिते ठाढ़ रहलीह। कनैत-कनैत ओ निहुड़ि कऽ कबर मे तकलनि। [12] ओ उज्जर वस्त्र पहिरने दू स्वर्गदूत केँ ओहिठाम बैसल देखलनि जाहिठाम यीशुक लास राखल गेल छल, एक सीरहान लग और दोसर पौथान लग।
मोन राखू जे अहाँ सभ केँ पुरस्कार पयबाक बात मे अयोग्य ठहरयबाक अधिकार ओहन लोक केँ नहि छैक जे सभ ईश्वरीय दर्शन देखबाक धाख जमबैत रहैत अछि, देखाबटी नम्रता प्रगट करैत अछि, आ कहैत अछि जे स्वर्गदूत सभक पूजा कयनाइ आवश्यक अछि। ओहन लोक अपन सांसारिक बुद्धिक कारणेँ बिनु आधारक घमण्ड सँ फुलि जाइत अछि,