एक विषय पर बाइबिल के श्लोक

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खराब चरित्र: [पाखंडी]
जँ केओ कहैत अछि जे, हम परमेश्‍वर सँ प्रेम करैत छी, जखन कि अपना भाय सँ घृणा करैत अछि, तँ ओ झूठ बाजऽ वला अछि। कारण, जे अपना भाय सँ जकरा ओ देखने छैक प्रेम नहि करैत अछि, से परमेश्‍वर सँ जिनका ओ नहि देखने छनि कोना प्रेम कऽ सकैत अछि?
सभ मनुष्‍यक आदर करू, विश्‍वासी भाय सभ सँ प्रेम राखू, परमेश्‍वरक भय मानू, आ राजाक सम्‍मान करू।
किएक तँ जँ केओ किछु नहि रहितो अपना केँ किछु बुझैत अछि तँ ओ अपना केँ धोखा दैत अछि।
“हमरा ‘प्रभु, प्रभु’ किएक कहैत छी, जखन की हमर कहल नहि करैत छी?
एहन किछु नहि अछि जे झाँपल होअय आ उघारल नहि जायत, वा जे नुकाओल होअय आ प्रगट नहि कयल जायत।
ओ उत्तर देलथिन जे, “हे पाखण्‍डी सभ! यशायाह अहाँ सभक बारे मे एकदम ठीक भविष्‍यवाणी कयलनि, जेना धर्मशास्‍त्र मे लिखल अछि जे, ‘ई सभ मुँह सँ हमर आदर करैत अछि, मुदा एकर सभक हृदय हमरा सँ दूर छैक।
“होसियार रहू, लोक केँ देखयबाक लेल अपन ‘धर्म-कर्म’ नहि करू, नहि तँ अहाँ केँ अपन पिता सँ, जे स्‍वर्ग मे छथि, कोनो फल नहि भेटत।
कारण, ओ सभ धार्मिक ठहरबाक ओहि माध्‍यम पर ध्‍यान नहि देलनि जे परमेश्‍वर स्‍थापित कयलनि, बल्‍कि अपन माध्‍यम स्‍थापित करबाक प्रयत्‍न कयलनि। एहि तरहेँ ओ सभ परमेश्‍वर द्वारा देल जाय वला धार्मिकताक अधीन भेनाइ अस्‍वीकार कयलनि।
ओ सभ अपना केँ परमेश्‍वर केँ जननिहार तँ कहैत अछि, मुदा अपना व्‍यवहार द्वारा हुनका अस्‍वीकार करैत अछि। ओ सभ घृणित अछि, आज्ञा उल्‍लंघन कयनिहार अछि और कोनो प्रकारक नीक काज करबाक जोगरक नहि अछि।
[27] “यौ धर्मशिक्षक आ फरिसी सभ, धिक्‍कार अछि अहाँ सभ केँ! अहाँ सभ पाखण्‍डी छी। अहाँ सभ चून सँ पोतल कबरक चबुतरा जकाँ छी, जे बाहर सँ तँ सुन्‍दर देखाइ दैत रहैत अछि, मुदा ओकरा भीतर मे लासक हाड़ आ सभ तरहक सड़ल वस्‍तु भरल रहैत छैक। [28] तहिना अहूँ सभ बाहर सँ लोक सभ केँ धार्मिक बुझाइत छिऐक, मुदा भीतर मे पाखण्‍ड आ अधर्म सँ भरल छी।
[46] विधवा सभक घर-द्वारि हड़पि लैत छथि, और लोक सभ केँ देखयबाक लेल लम्‍बा-लम्‍बा प्रार्थना करैत छथि। ओहन लोक केँ बेसी दण्‍ड भेटतैक।” [47] यीशु नजरि उठा कऽ देखलनि जे धनिक सभ मन्‍दिरक दान-पात्र मे अपन दान चढ़ा रहल अछि।
[22] अहाँ सभ वचनक पालन कयनिहार बनू, नहि कि मात्र सुननिहार। जँ सुननिहारे छी तँ अपना केँ धोखा दैत छी। [23] जे केओ वचन केँ सुनैत अछि मुदा तकर पालन नहि करैत अछि, से ओहन मनुष्‍य जकाँ अछि जे अपन मुँह अएना मे देखैत अछि,
[16] मुदा अहाँ जखन उपास करी तँ तेल-कुड़ लिअ आ अपन मुँह-हाथ धोउ, [17] जाहि सँ लोक नहि बुझय जे अहाँ उपास कयने छी, बल्‍कि मात्र अहाँक पिता, जिनका केओ नहि देखि सकैत छनि, से बुझथि। एहि सँ अहाँक पिता जे गुप्‍त काज केँ सेहो देखैत छथि, से अहाँ केँ प्रतिफल देताह। [18] “पृथ्‍वी पर अपना लेल धन जमा नहि करू जतऽ कीड़ा आ बीझ ओकरा नष्‍ट कऽ दैत अछि, और चोर सेन्‍ह काटि कऽ ओकर चोरी कऽ लैत अछि।
[21] “ई बात नहि अछि जे, जतेक लोक हमरा ‘हे प्रभु, हे प्रभु’ कहैत अछि, ताहि मे सँ सभ केओ स्‍वर्गक राज्‍य मे प्रवेश करत, बल्‍कि मात्र वैह सभ प्रवेश करत जे सभ हमर पिता जे स्‍वर्ग मे छथि तिनकर इच्‍छानुरूप चलैत अछि। [22] न्‍यायक दिन बहुतो लोक हमरा कहत, ‘हे प्रभु! हे प्रभु! की हम सभ अहाँक नाम लऽ कऽ भविष्‍यवाणी नहि कयलहुँ? की हम सभ अहाँक नाम लऽ कऽ दुष्‍टात्‍मा सभ केँ नहि निकाललहुँ? की हम सभ अहाँक नाम लऽ कऽ अनेको चमत्‍कार नहि कयलहुँ?’ [23] तखन हम ओकरा सभ केँ स्‍पष्‍ट कहबैक, ‘हम तोरा सभ केँ कहियो नहि चिन्‍हलिऔ। है कुकर्मी सभ, भाग हमरा लग सँ!’
[7] हे पाखण्‍डी सभ! यशायाह अहाँ सभक सम्‍बन्‍ध मे एकदम ठीक भविष्‍यवाणी कयलनि जे, [8] ‘ई सभ मुँह सँ हमर आदर करैत अछि, मुदा एकर सभक हृदय हमरा सँ दूर छैक। [9] ई सभ बेकार हमर उपासना करैत अछि। ई सभ जे शिक्षा दैत अछि, से मात्र मनुष्‍यक बनाओल नियम सभ अछि।’ ”
[1] “होसियार रहू, लोक केँ देखयबाक लेल अपन ‘धर्म-कर्म’ नहि करू, नहि तँ अहाँ केँ अपन पिता सँ, जे स्‍वर्ग मे छथि, कोनो फल नहि भेटत। [2] “अहाँ जखन गरीब सभ केँ दान दैत छी तखन तकर ढोल नहि पिटू, जेना पाखण्‍डी लोक सभाघर मे और रस्‍ता सभ मे करैत रहैत अछि, जाहि सँ लोक ओकर प्रशंसा करैक। हम अहाँ सभ केँ सत्‍य कहैत छी, लोकक प्रशंसा पाबि ओ सभ ओहि सँ बेसी कोनो इनामक बाट बेकार ताकत। [3] “मुदा अहाँ जखन दान करी तखन अहाँक ई काज एतेक गुप्‍त होअय जे अहाँक बामा हाथ सेहो नहि जानय जे अहाँक दहिना हाथ की कऽ रहल अछि। तखन अहाँक पिता जे गुप्‍त काज केँ सेहो देखैत छथि, से अहाँ केँ तकर प्रतिफल देताह। [4] “जखन परमेश्‍वर सँ प्रार्थना करी, तँ पाखण्‍डी जकाँ नहि बनू, किएक तँ ओ सभ सभाघर सभ मे आ चौक सभ पर ठाढ़ भऽ कऽ प्रार्थना कयनाइ बहुत पसन्‍द करैत अछि, जाहि सँ लोक ओकरा सभ केँ देखैक। हम अहाँ सभ केँ सत्‍य कहैत छी जे, लोक ओकरा सभ केँ देखलक, ओहि सँ बेसी ओ सभ कोनो इनामक बाट बेकार ताकत।
[1] मुदा अहाँ ई निश्‍चित रूप सँ जानि लिअ जे अन्‍तिम दिन सभ मे संकटपूर्ण समय आओत। [2] किएक तँ लोक स्‍वार्थी, धनक लोभी, अहंकारी, उदण्‍ड, परमेश्‍वरक निन्‍दा कयनिहार होयत। माय-बाबूक आज्ञा नहि मानत, धन्‍यवाद देबाक भावना नहि राखत, आ परमेश्‍वर सँ ओकरा सभ केँ कोनो मतलब नहि रहतैक। [3] ओकरा सभ मे ने स्‍नेह रहत आ ने ककरो लेल दया, ओ सभ दोसराक निन्‍दा कयनिहार होयत, अपना पर काबू नहि राखत, आ क्रूर होयत। जे किछु नीक अछि, ताहि सँ घृणा करत। [4] ओ सभ विश्‍वासघाती, दुःसाहसी आ घमण्‍डी होयत। परमेश्‍वर सँ प्रेम करबाक बदला मे भोग-विलास सँ प्रेम करत। [5] ओ सभ भक्‍तिक ढोङ रचत मुदा भक्‍तिक भितरी शक्‍ति केँ अस्‍वीकार करत। अहाँ एहन लोक सभ सँ हटि कऽ रहू।
[1] तेँ यौ दोष लगौनिहार, अहाँ जे केओ होइ, निरुत्तर छी, किएक तँ जाहि बात मे अहाँ अनका पर दोष लगबैत छी ताही मे अहाँ अपने केँ दोषी ठहरबैत छी, कारण, जे दोष अहाँ अनका पर लगबैत छी सैह काज अपनो करैत छी। [2] और अपना सभ जनैत छी जे एहन अधलाह काज कयनिहार लोक सभ पर परमेश्‍वरक दिस सँ दण्‍डक आज्ञा उचिते होइत अछि। [3] यौ जी, अहाँ दोसर पर जे एहन काज करबाक दोष लगबैत छी आ स्‍वयं वैह काज करैत छी, तँ की अहाँ सोचैत छी जे अहाँ परमेश्‍वरक दण्‍डक आज्ञा सँ बाँचि जायब? [4] वा की अहाँ परमेश्‍वरक असीम कृपा, सहनशीलता आ धैर्य केँ तुच्‍छ मानैत छी आ ई नहि जनैत छी जे परमेश्‍वर अपना कृपा द्वारा अहाँ केँ अपना पापक लेल पश्‍चात्ताप कऽ कऽ हृदय-परिवर्तन करबाक अवसर दऽ रहल छथि? [5] मुदा अपन जिद्दीपन आ अपरिवर्तित हृदयक कारणेँ अहाँ अपना लेल परमेश्‍वरक प्रकोप केँ ओहि दिनक लेल संचित कऽ रहल छी जहिया परमेश्‍वरक प्रकोप आ उचित न्‍याय प्रगट होयत।
[21] तेँ सभ प्रकारक गन्‍दा आचार-व्‍यवहार आ सभ तरहक अधलाह बात केँ पूर्ण रूप मे अपना सँ दूर कऽ कऽ हृदय मे रोपल गेल परमेश्‍वरक ओहि वचन केँ नम्रतापूर्बक स्‍वीकार करू जे वचन अहाँ सभक उद्धार कऽ सकैत अछि। [22] अहाँ सभ वचनक पालन कयनिहार बनू, नहि कि मात्र सुननिहार। जँ सुननिहारे छी तँ अपना केँ धोखा दैत छी। [23] जे केओ वचन केँ सुनैत अछि मुदा तकर पालन नहि करैत अछि, से ओहन मनुष्‍य जकाँ अछि जे अपन मुँह अएना मे देखैत अछि, [24] तकरबाद चल जाइत अछि आ तुरत बिसरि जाइत अछि जे ओ छल केहन। [25] मुदा जे व्‍यक्‍ति परमेश्‍वरक ओ नियम जाहि मे कोनो त्रुटी नहि अछि और जे अपना सभ केँ स्‍वतन्‍त्र करैत अछि तकरा ध्‍यान सँ देखि ओहि मे बनल रहैत अछि, से व्‍यक्‍ति वचन सुनि कऽ बिसरऽ वला नहि, बल्‍कि तकर पालन करऽ वला बनैत अछि। एहन व्‍यक्‍ति अपन सभ काज मे आशिष पाओत। [26] जँ केओ अपना केँ धार्मिक बुझैत अछि मुदा अपन मुँह काबू मे नहि रखैत अछि तँ ओ अपना केँ धोखा दैत अछि और ओकर ओ धर्म बेकार छैक।
[37] “दोसराक न्‍याय नहि करू, तँ अहूँक न्‍याय नहि कयल जायत। दोसर केँ दोषी नहि ठहराउ, तँ अहूँ दोषी नहि ठहराओल जायब। माफ करिऔक, तँ अहूँ केँ माफ कयल जायत। [38] दिऔक, तँ अहूँ केँ देल जायत। पूरा-पूरी नाप, दबा-दबा कऽ, हिला-डोला कऽ आ उमड़ा-उमड़ा कऽ अहाँ केँ देल जायत। किएक तँ जाहि नाप सँ अहाँ नपैत छी, ताहि नाप सँ अहूँ केँ देल जायत।” [39] तकरबाद ओ हुनका सभ केँ ई दृष्‍टान्‍त दैत कहलथिन, “की एक आन्‍हर दोसर आन्‍हर केँ बाट देखा सकैत अछि? की एहि तरहेँ दूनू खधिया मे नहि खसत? [40] चेला अपना गुरु सँ पैघ नहि होइत अछि, मुदा जखन ओ पूर्ण शिक्षा प्राप्‍त करत तखन अपना गुरु जकाँ बनत। [41] “अहाँ अपन भायक आँखि मेहक काठक कुन्‍नी किएक देखैत छी? की अपना आँखि मेहक ढेंग नहि सुझाइत अछि? [42] अपना भाय केँ अहाँ कोना कहैत छी जे, ‘हौ भाइ, लाबह, हम तोरा आँखि मे सँ ओ कुन्‍नी निकालि दैत छिअह’, जखन कि अपना आँखि मेहक ढेंग नहि देखैत छी? हे पाखण्‍डी! पहिने अपना आँखि मेहक ढेंग निकालि लिअ, तखने अपन भायक आँखि मेहक कुन्‍नी निकालबाक लेल अहाँ ठीक सँ देखि सकब।
[1] “ककरो दोषी नहि ठहराउ जाहि सँ अहूँ सभ दोषी नहि ठहराओल जाइ। [2] जाहि तरहेँ अहाँ दोषी ठहरायब ताहि तरहेँ अहूँ दोषी ठहराओल जायब, आ जाहि नाप सँ अहाँ नापब, सैह नाप अहूँ पर लागू होयत। [3] “अहाँ अपन भायक आँखि मेहक काठक कुन्‍नी किएक देखैत छी? की अपना आँखि मेहक ढेंग नहि सुझाइत अछि? [4] अहाँ अपना भाय केँ कोना कहैत छी जे, ‘आउ, हम अहाँक आँखि मे सँ कुन्‍नी निकालि दैत छी,’ जखन कि अहाँक अपने आँखि मे ढेंग अछि? [5] हे पाखण्‍डी, पहिने अपना आँखि मेहक ढेंग निकालि लिअ, तखने अपन भायक आँखि मेहक कुन्‍नी निकालबाक लेल अहाँ ठीक सँ देखि सकब। [6] “पवित्र वस्‍तु कुकुर सभ केँ नहि दिअ, आ ने अपन हीरा-मोती सुगरक आगाँ फेकू, नहि तँ एना नहि होअय जे ओ सभ पयर सँ ओकरा धाँगि दय आ घूमि कऽ अहाँ सभ केँ चीरि-फाड़ि दय।
[1] यौ बौआ सभ, हम अहाँ सभ केँ ई बात एहि लेल लिखि रहल छी जे अहाँ सभ पाप नहि करी। मुदा जँ केओ पाप करय तँ अपना सभ केँ एक गोटे छथि जे पिता लग अपना सभक पक्ष मे विनती करैत छथि, अर्थात् यीशु मसीह, जे धार्मिक छथि। [2] यीशु मसीह स्‍वयं ओ बलि छथि जिनका द्वारा अपना सभक पापक प्रायश्‍चित्त कयल गेल, और मात्र अपना सभक पापक नहि, बल्‍कि सौंसे संसारक सेहो। [3] अपना सभ हुनका चिन्‍हैत छियनि से तखने जानि सकैत छी जखन हुनकर आज्ञाक पालन करैत छियनि। [4] जे केओ कहैत अछि जे, हम हुनका चिन्‍हैत छियनि, मुदा हुनकर आज्ञाक पालन नहि करैत अछि, से झुट्ठा अछि और ओकरा मे सत्‍य नहि छैक। [5] मुदा जे केओ हुनकर वचनक अनुसार चलैत अछि, तकरा मे परमेश्‍वरक प्रति ओकर प्रेम पूर्ण रूप सँ सिद्ध कयल गेल छैक। अपना सभ एहि सँ निश्‍चय जानि सकैत छी जे हुनका मे छी— [6] जे केओ कहैत अछि जे, हम परमेश्‍वर मे रहैत छी, तकरा ओहने जीवन व्‍यतीत करबाक छैक जेहन यीशु व्‍यतीत कयलनि।
[10] “जे छोट बात सभ मे विश्‍वासपात्र अछि, से पैघो बात सभ मे विश्‍वासपात्र रहत। जे छोट बात मे बइमान अछि, से पैघो बात मे बइमान रहत। [11] अहाँ सांसारिक धन मे जँ विश्‍वासपात्र नहि भेलहुँ, तँ वास्‍तविक धन दऽ कऽ अहाँ पर के विश्‍वास करत? [12] जँ अनका धन मे अहाँ विश्‍वासपात्र नहि भेलहुँ, तँ अहाँक अपन धन अहाँ केँ के देत? [13] “कोनो खबास दूटा मालिकक सेवा नहि कऽ सकैत अछि। कारण, ओ एक सँ घृणा करत आ दोसर सँ प्रेम, अथवा पहिल केँ खूब मानत आ दोसर केँ तुच्‍छ बुझत। अहाँ परमेश्‍वर और धन-सम्‍पत्ति दूनूक सेवा नहि कऽ सकैत छी।” [14] फरिसी सभ, जे धनक लोभी छलाह, से सभ ई सभ बात सुनि रहल छलाह और हुनकर हँसी उड़ाबऽ लगलनि। [15] यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन, “अहाँ सभ ठीक ओहन लोक सभ छी जे मनुष्‍यक सामने अपना केँ धर्मी ठहरबैत छी, मुदा परमेश्‍वर अहाँ सभक मोन केँ जनैत छथि। जे मनुष्‍यक नजरि मे सम्‍मानजनक बात अछि, से परमेश्‍वरक दृष्‍टि मे घृणित अछि।
[14] यौ हमर भाइ लोकनि, केओ जँ कहैत अछि जे, “हम विश्‍वास करैत छी,” मुदा ओ ताहि अनुरूप काज नहि करैत अछि तँ ओहि सँ ओकरा लाभ की होयतैक? की एहन विश्‍वास ओकर उद्धार कऽ सकैत छैक? [15] जँ कोनो भाय वा कोनो बहिन केँ पहिरबाक लेल वस्‍त्र नहि छैक आ खयबाक लेल भोजनक वस्‍तु नहि छैक, [16] आ तकरा अहाँ सभ मे सँ केओ कहैत छिऐक जे, “कुशलपूर्बक जाउ, आराम सँ पहिरू-ओढू आ भरि पेट भोजन करू,” मुदा ओकरा जे शरीरक लेल आवश्‍यक छैक तकर पूर्ति जँ नहि करैत छिऐक तँ ओहि सँ लाभ की? [17] एहि तरहेँ विश्‍वास सेहो, जँ मात्र विश्‍वासे अछि आ तकरा संग काज नहि अछि तँ निर्जीव अछि। [18] मुदा एहन व्‍यक्‍ति केँ केओ कहि सकैत छैक जे, “अहाँ विश्‍वास करैत छी आ हम काज करैत छी; आब अहाँ अपन विश्‍वास बिनु काज सभक द्वारा देखाउ आ हम अपन काज सभक द्वारा देखायब जे हमरा विश्‍वासो अछि।” [19] अहाँक विश्‍वास अछि जे परमेश्‍वर एकेटा छथि। बड्ड बढ़ियाँ! दुष्‍टात्‍मा सभ सेहो यैह बात विश्‍वास करैत अछि आ थर-थर कँपैत अछि। [20] यौ मूर्ख, की अहाँ एहि बात केँ मानबाक लेल तैयार नहि छी जे बिनु काजक विश्‍वास बेकार अछि? [21] अपना सभक पूर्वज अब्राहम जहिया परमेश्‍वरक आज्ञा मानि अपन पुत्र इसहाक केँ परमेश्‍वर केँ चढ़यबाक लेल वेदी पर राखि देलनि, तहिया की ओ एहि काजेक द्वारा धार्मिक नहि ठहराओल गेलाह? [22] की देखाइ नहि दैत अछि जे विश्‍वास हुनका काज मे क्रियाशील छलनि आ काजेक द्वारा हुनकर विश्‍वास पूर्ण भेलनि? [23] और धर्मशास्‍त्रक ई लेख पूरा भेल जे, “अब्राहम परमेश्‍वरक बातक विश्‍वास कयलनि और ई विश्‍वास हुनका लेल धार्मिकता मानल गेलनि।” और ओ परमेश्‍वरक मित्र कहाओल गेलाह। [24] देखैत छी ने, मनुष्‍य मात्र विश्‍वासे सँ नहि, बल्‍कि काज सँ धार्मिक ठहराओल जाइत अछि। [25] तहिना की वेश्‍या राहाब सेहो अपन काजेक द्वारा धार्मिक नहि ठहराओल गेलि जखन ओ जासूस सभ केँ अपना घर मे सत्‍कारक संग रखलकैक आ दोसर बाट सँ पठा देलकैक? [26] तेँ जहिना शरीर आत्‍माक बिना निर्जीव अछि ठीक तहिना विश्‍वास सेहो काजक बिना निर्जीव अछि।
Maithili Bible 2010
2010 The Bible Society of India and Wycliffe Bible Translators, Inc