[24] प्रेम आ भलाइक काज करऽ मे अपना सभ एक-दोसर केँ कोना प्रेरित कऽ सकी ताहि पर ध्यान राखी। [25] अपना सभ एक संग जमा भेनाइ नहि छोड़ी जेना कि किछु लोकक आदत अछि, बल्कि एक-दोसर केँ प्रोत्साहित करैत रही, विशेष कऽ आब जखन देखैत छी जे ओ दिन लगचिआ गेल अछि जहिया यीशु फेर औताह।
किएक तँ जतऽ दू वा तीन व्यक्ति हमरा नाम सँ एक ठाम जमा होइत अछि, ततऽ हम ओकरा सभक बीच उपस्थित छी।”
मसीहक वचन केँ अपन परिपूर्णताक संग अहाँ सभ अपना मे निवास करऽ दिअ। पूर्ण बुद्धि-ज्ञानक संग एक-दोसर केँ शिक्षा आ चेतावनी दैत रहू, आ परमेश्वरक प्रशंसा मे भजन, स्तुति-गान आ भक्तिक गीत पूरा मोन सँ धन्यवादक संग गबैत रहू।
[11] वैह विभिन्न वरदान बँटलनि—किछु लोक केँ मसीह-दूत होयबाक वरदान देलथिन, किछु लोक केँ परमेश्वरक प्रवक्ता होयबाक, किछु लोक केँ शुभ समाचारक प्रचार करऽ वला होयबाक, आ किछु लोक केँ मण्डलीक देख-रेख करऽ वला और शिक्षक होयबाक वरदान देलथिन। [12] ई वरदान सभ देबऽ मे मसीहक उद्देश्य ई छलनि जे एहि सभ द्वारा परमेश्वरक लोक केँ सेवा-काज सभ करबाक लेल तैयार कयल जाय जाहि सँ हुनकर देह मजगूत होनि। [13] एहि तरहेँ अपना सभ केओ संग-संग बढ़ि कऽ, विश्वास मे और परमेश्वरक पुत्रक ज्ञान मे एक भऽ जायब, और पूर्ण सिद्धता, अर्थात् मसीहक पूर्णता, धरि पहुँचब।
ओ सभ मसीह-दूत सभक शिक्षा मे, सत्संग मे, “प्रभु-भोज” मे आ प्रार्थना मे तल्लीन रहऽ लागल।
एहि तरहेँ अपना सभ देखैत छी जे, सुनलाक बादे केओ विश्वास कऽ सकैत अछि, आ जे सुनबाक अछि, से अछि मसीहक वचन।
हम अहाँ केँ कहैत छी जे, अहाँ ‘पत्रुस’ छी। हम एहि चट्टान पर अपन मण्डलीक स्थापना करब आ मृत्युक सामर्थ्य एहि पर विजयी नहि होयत।
[31] तकरबाद समस्त यहूदिया, गलील आ सामरिया प्रदेश मे विश्वासी मण्डली केँ अत्याचार सँ आराम भेटल। प्रभुक आदर करैत आ आज्ञा मानैत मण्डली मजगूत होइत गेल और परमेश्वरक पवित्र आत्मा सँ प्रोत्साहित भऽ विश्वासी सभक संख्या बढ़ैत गेल। [32] पत्रुस बहुत ठाम घुमैत-फिरैत लुद्दा नामक गाम मे विश्वासी सभ सँ भेँट करबाक लेल अयलाह।
“तेँ काल्हि की होयत तकर चिन्ता नहि करू, किएक तँ काल्हि अपन चिन्ता अपने कऽ लेत। आजुक लेल तँ अजुके दुःख बहुत अछि।
अहाँ सभ वचनक पालन कयनिहार बनू, नहि कि मात्र सुननिहार। जँ सुननिहारे छी तँ अपना केँ धोखा दैत छी।
परमेश्वरक वचनक प्रचार करू, समय-असमय एहि मे लागल रहू। पूरा-पूरी धैर्य राखि शिक्षा दऽ कऽ लोक सभ केँ समझाउ-बुझाउ, चेतावनी दिअ, आ हिम्मत बढ़ाउ।
[19] एहि लेल अहाँ सभ आब जा कऽ सभ जातिक लोक केँ हमर शिष्य बनाउ और ओकरा सभ केँ पिता, पुत्र आ पवित्र आत्माक नाम सँ बपतिस्मा दिऔक। [20] हम जतेक आदेश अहाँ सभ केँ देने छी तकर सभक पालन करबाक लेल ओकरा सभ केँ सिखाउ। मोन राखू, संसारक अन्त तक हम सदिखन अहाँ सभक संग छी।”
Maithili Bible 2010
2010 The Bible Society of India and Wycliffe Bible Translators, Inc