प्रत्येक व्यक्ति, जतबा ओ अपना मोन मे निश्चय कयने होअय ततबा देअय, दुखी भऽ कऽ वा जोर-जबरदस्तीक कारणेँ नहि, किएक तँ प्रसन्नतापूर्बक देबऽ वला सँ परमेश्वर प्रेम करैत छथिन।
हम अपन सभ काज मे अहाँ सभ केँ देखा देलहुँ जे कोना एहि तरहक परिश्रम कऽ कऽ अपना सभ केँ निर्बल सभक सहयोग करबाक अछि, आ प्रभु यीशुक कहल बात केँ मोन रखबाक अछि जे ओ अपने बाजल छलाह, ‘लेबऽ सँ देबऽ मे आशिष अछि।’ ”
[15] तेँ अपना सभ यीशुक माध्यम सँ परमेश्वर केँ स्तुति-बलिदान सदत चढ़बैत रही, अर्थात् मुँह सँ हुनकर नामक गुणगान रूपी चढ़ौना। [16] आ तकरा संग अहाँ सभ भलाइक काज कयनाइ आ अपन चीज-वस्तु सँ दोसराक सहायता कयनाइ नहि बिसरू, कारण एहन बलिदान सँ परमेश्वर प्रसन्न होइत छथि।
“जे छोट बात सभ मे विश्वासपात्र अछि, से पैघो बात सभ मे विश्वासपात्र रहत। जे छोट बात मे बइमान अछि, से पैघो बात मे बइमान रहत।
“यौ धर्मशिक्षक आ फरिसी सभ, धिक्कार अछि अहाँ सभ केँ! अहाँ सभ पाखण्डी छी! अहाँ सभ पुदीना, सोंफ आ जीरक दसम भाग तँ परमेश्वर केँ अर्पण करैत छी, मुदा धर्म-नियमक मुख्य बात सभ, जेना न्याय, करुणा आ विश्वसनियता सँ कोनो मतलब नहि रखैत छी। होयबाक तँ ई चाहैत छल जे अहाँ सभ बिनु ओ बात सभ छोड़ने इहो बात सभ करितहुँ।
तेँ यौ भाइ लोकनि, हम अहाँ सभ सँ आग्रह करैत छी जे, परमेश्वरक अपार दयाक कारणेँ जे ओ अपना सभ पर कयने छथि, अहाँ सभ अपना शरीर केँ जीवित, पवित्र आ परमेश्वर द्वारा ग्रहणयोग्य बलिदानक रूप मे हुनका अर्पित करू। यैह भेल अहाँ सभक लेल परमेश्वरक असली आत्मिक आराधना कयनाइ।
[33] अपन सम्पत्ति बेचि कऽ गरीब सभ केँ दिअ। अपना लेल एहन बटुआ बना लिअ जे कहियो नहि पुरान होइत अछि, स्वर्ग मे धन जमा करू जे कहियो घटैत नहि अछि, जकरा ने चोर छुबि सकैत अछि आ ने कीड़ा नोकसान कऽ सकैत अछि। [34] कारण, जतऽ अहाँक धन अछि ततहि अहाँक मोनो लागल रहत।
[19] बल्कि अपना लेल स्वर्ग मे धन जमा करू, जतऽ ने कीड़ा आ ने बीझ ओकरा नष्ट करैत अछि, आ ने चोर सेन्ह काटि कऽ ओकर चोरी करैत अछि। [20] कारण, जतऽ अहाँक धन अछि ततहि अहाँक मोनो लागल रहत। [21] “शरीरक डिबिया आँखि अछि! जँ अहाँक आँखि ठीक अछि तँ अहाँक सम्पूर्ण शरीर इजोत मे रहत।
[31] कारण, एहि सभ बातक पाछाँ तँ परमेश्वर केँ नहि चिन्हऽ वला जातिक लोक सभ पड़ल रहैत अछि। अहाँ सभक पिता जे स्वर्ग मे छथि से जनैत छथि जे अहाँ सभ केँ एहि बात सभक आवश्यकता अछि। [32] बल्कि सभ सँ पहिने परमेश्वरक राज्य पर, आ परमेश्वर जाहि प्रकारक धार्मिकता अहाँ सँ चाहैत छथि, ताहि पर मोन लगाउ, तँ ई सभ वस्तु सेहो अहाँ केँ देल जायत। [33] “तेँ काल्हि की होयत तकर चिन्ता नहि करू, किएक तँ काल्हि अपन चिन्ता अपने कऽ लेत। आजुक लेल तँ अजुके दुःख बहुत अछि।
[41] तखन यीशु मन्दिर मे दान-पात्र लग बैसि कऽ लोक सभ केँ ओहि मे दान दैत देखलनि। बहुत लोक जे सभ धनिक छल से सभ ओहि मे बहुत किछु रखैत छल। [42] तखन एकटा गरीब विधवा आबि कऽ तामक दूटा पाइ, जकर मूल्य एको पैसा सँ कम छलैक, से दान-पात्र मे देलक। [43] यीशु शिष्य सभ केँ अपना लग बजा कऽ कहलथिन, “हम अहाँ सभ केँ सत्य कहैत छी जे, ई गरीब विधवा ओहि सभ लोक सँ बेसी दान चढ़ौलक, [44] किएक तँ ओ सभ धनिक भऽ कऽ अपन फाजिल धन मे सँ दान चढ़ौलक मुदा ई गरीब भऽ कऽ अपना लेल किछु नहि राखि अपन पूरा जीविके चढ़ा देलक।”
[1] यीशु नजरि उठा कऽ देखलनि जे धनिक सभ मन्दिरक दान-पात्र मे अपन दान चढ़ा रहल अछि। [2] एकटा गरीब विधवा केँ सेहो तामक दूटा पाइ दान-पात्र मे दैत देखलनि। [3] ई देखि ओ बजलाह, “हम अहाँ सभ केँ सत्य कहैत छी जे, ई गरीब विधवा ओहि सभ आदमी सँ बेसी चढ़ौलक। [4] ओ सभ तँ अपना फाजिल धन मे सँ दान चढ़ौलक, मुदा ई अपन गरीबी मे सँ अपन पूरा जीविके चढ़ा देलक।”
Maithili Bible 2010
2010 The Bible Society of India and Wycliffe Bible Translators, Inc