[11] हमर कहबाक मतलब ई अछि जे जँ कोनो व्यक्ति मसीही भाइ कहबैत अछि, मुदा ओ अनैतिक सम्बन्ध राखऽ वला, लोभी, मूर्तिक पूजा कयनिहार, गारि पढ़ऽ वला, पिअक्कड़ वा धोखेबाज अछि तँ ओकर संगति नहि करू; ओहन व्यक्तिक संग भोजन तक नहि करू। [12] किएक तँ हमरा बाहरक लोकक न्याय करबाक कोन काज? की अहाँ सभ केँ ताही लोक सभक न्याय नहि करबाक अछि जे सभ मण्डली मे अछि? [13] बाहरक लोक सभक न्याय परमेश्वर करताह। मुदा जेना धर्मशास्त्र मे लिखल अछि, “अहाँ सभ अपना बीच सँ ओहि अधर्मी व्यक्ति केँ बाहर निकालि दिऔक।”
मुदा जँ अपना सभ अपन पाप केँ मानि लेब तँ ओ जे विश्वासयोग्य और न्यायी छथि अपना सभ केँ पापक क्षमा करताह और अपना सभ केँ सभ अधर्म सँ शुद्ध करताह।
[8] अधलाह बातक बदला अधलाह बात सँ नहि दिअ, वा अपमानक बदला अपमान सँ नहि, बल्कि आशीर्वाद सँ दिअ। किएक तँ अहाँ सभ यैह करबाक लेल बजाओल गेल छी, जाहि सँ अहाँ सभ आशिष प्राप्त करब। [9] जेना धर्मशास्त्र कहैत अछि, “जे केओ जीवन मे आनन्द उठाबऽ चाहैत अछि आ नीक दिन देखऽ चाहैत अछि, से अपना जीह केँ अधलाह बात सभ बाजऽ सँ आ अपना ठोर केँ कपटपूर्ण बात सभ बाजऽ सँ रोकय।
“हँ, परमेश्वर संसार सँ एहन प्रेम कयलनि जे ओ अपन एकमात्र बेटा केँ दऽ देलनि, जाहि सँ जे केओ हुनका पर विश्वास करैत अछि से नाश नहि होअय, बल्कि अनन्त जीवन पाबय।
किएक तँ परमेश्वर ककरो संग पक्षपात नहि करैत छथि।
मुदा परमेश्वर अपना प्रेम केँ अपना सभक प्रति एहि तरहेँ देखबैत छथि जे, जखन अपना सभ पापिए छलहुँ तखने मसीह अपना सभक लेल मरलाह।
एहि बात सभक सम्बन्ध मे आब अपना सभ की कही? जँ परमेश्वर अपना सभक पक्ष मे छथि तँ अपना सभक विरोध मे के भऽ सकत?
[1] जे व्यक्ति विश्वास मे कमजोर अछि, तकरा स्वीकार करू और व्यक्तिगत विचारधाराक कारण ओकरा सँ वाद-विवाद नहि करू। [2] केओ विश्वास करैत अछि जे सभ प्रकारक भोजन कयनाइ उचित अछि। दोसर, जकर विश्वास कमजोर अछि, से मात्र साग-पात खाइत अछि।
[24] प्रेम आ भलाइक काज करऽ मे अपना सभ एक-दोसर केँ कोना प्रेरित कऽ सकी ताहि पर ध्यान राखी। [25] अपना सभ एक संग जमा भेनाइ नहि छोड़ी जेना कि किछु लोकक आदत अछि, बल्कि एक-दोसर केँ प्रोत्साहित करैत रही, विशेष कऽ आब जखन देखैत छी जे ओ दिन लगचिआ गेल अछि जहिया यीशु फेर औताह।
[35] यीशु बजलाह, “जीवनक रोटी हमहीं छी। जे हमरा लग आओत से कहियो भूखल नहि रहत। जे हमरा पर विश्वास करत, तकरा कहियो पियास नहि लगतैक। [36] मुदा जेना अहाँ सभ केँ कहने छलहुँ, अहाँ सभ हमरा देखने छी और तैयो विश्वास नहि करैत छी। [37] जकरा पिता हमरा दैत छथि, से सभ हमरा लग आओत, और जे केओ हमरा लग आओत, तकरा हम कहियो नहि अस्वीकार करब।
[12] तेँ अहाँ सभ परमेश्वरक चुनल लोक, हुनकर पवित्र और प्रिय लोक सभ भऽ कऽ, दयालुता, करुणा, नम्रता, कोमलता आ सहनशीलता केँ धारण करू। [13] एक-दोसराक संग सहनशील होउ, आ जँ किनको ककरो सँ सिकायत होअय, तँ एक-दोसर केँ क्षमा करू। जहिना प्रभु अहाँ सभ केँ क्षमा कऽ देलनि, तहिना अहूँ सभ क्षमा करू। [14] आ सभ सँ पैघ बात ई अछि जे आपस मे प्रेम भाव बनौने रहू। प्रेम सभ केँ एकता मे बान्हि कऽ पूर्णता धरि पहुँचा दैत अछि।
[34] “तकरबाद राजा अपन दहिना कात ठाढ़ भेल लोक सभ केँ कहथिन, ‘हे हमर पिताक कृपापात्र सभ! आउ, ओहि राज्यक अधिकारी बनू, जकरा सृष्टिक आरम्भ सँ अहाँ सभक लेल तैयार कयल गेल अछि। [35] कारण, हम भूखल छलहुँ आ अहाँ सभ हमरा भोजन करौलहुँ। हम पियासल छलहुँ आ अहाँ सभ हमरा पानि पिऔलहुँ। हम परदेशी छलहुँ आ अहाँ सभ अपना घर मे हमर सेवा-सत्कार कयलहुँ। [36] हम नाङट छलहुँ आ अहाँ सभ हमरा वस्त्र पहिरौलहुँ। हम बिमार छलहुँ आ अहाँ सभ हमर रेख-देख कयलहुँ। हम जहल मे छलहुँ आ अहाँ सभ हमरा सँ भेँट करबाक लेल अयलहुँ।’ [37] “ताहि पर ओ धर्मी लोक सभ हुनका कहथिन, ‘यौ प्रभु, हम सभ अहाँ केँ कहिया भूखल देखलहुँ आ भोजन करौलहुँ, पियासल देखलहुँ आ पानि पिऔलहुँ? [38] हम सभ अहाँ केँ कहिया परदेशी देखलहुँ आ अपना घर मे सेवा-सत्कार कयलहुँ, नाङट देखलहुँ आ वस्त्र पहिरौलहुँ? [39] कहिया हम सभ अहाँ केँ बिमार वा जहल मे देखलहुँ आ अहाँ सँ भेँट करबाक लेल गेलहुँ?’ [40] एहि पर राजा हुनका सभ केँ उत्तर देथिन, ‘हम अहाँ सभ केँ सत्य कहैत छी जे, जे किछु अहाँ सभ हमर एहि भाय सभ मे सँ ककरो लेल, छोटो सँ छोटक लेल कयलहुँ, से हमरा लेल कयलहुँ।’
[1] अपना सभ, जे सभ विश्वास मे मजगूत छी, अपना सभ केँ चाही जे, विश्वास मे कमजोर भाय सभक कमजोरी सभ मे धैर्य राखि कऽ मदति करी, नहि कि मात्र अपन खुशीक ध्यान राखी। [2] अपना सभ मे सँ प्रत्येक गोटे केँ अपना भायक कल्याणक लेल आ हुनका विश्वास मे मजगूत बनयबाक लेल हुनकर खुशीक ध्यान रखबाक चाही। [3] किएक तँ मसीह सेहो अपन खुशीक ध्यान नहि रखलनि। जेना धर्मशास्त्र मे लिखल अछि जे, “हे परमेश्वर, अहाँक निन्दा करऽ वला सभक निन्दा हमरा पर पड़ल।” [4] धर्मशास्त्र मे जतेक बात पहिने सँ लिखल गेल अछि से सभ अपना सभक शिक्षाक लेल लिखल गेल अछि, जाहि सँ अपना सभ ओहि धर्मशास्त्रक द्वारा धैर्य आ प्रोत्साहन पाबि अपन आशा केँ मजगूत राखि सकी। [5] धैर्य आ प्रोत्साहन देबऽ वला परमेश्वर अहाँ सभ केँ एहन वरदान देथि जे अहाँ सभ मसीह यीशुक शिक्षाक अनुसार आपस मे मेल-मिलापक भावना रखने रही, [6] जाहि सँ अहाँ सभ एक मोनक भऽ एक स्वर सँ अपना सभक प्रभु यीशु मसीहक परमेश्वर आ पिताक स्तुति करैत रहियनि। [7] जहिना मसीह अहाँ सभ केँ स्वीकार कयलनि, तहिना अहूँ सभ एक-दोसर केँ स्वीकार करू, जाहि सँ परमेश्वरक स्तुति होनि।
[10] तखन अहाँ अपना भाय पर किएक दोष लगबैत छी? और एम्हर, अहाँ जे छी, अहाँ अपना भाय केँ हेय दृष्टि सँ किएक देखैत छी? कारण, अपना सभ गोटे केँ तँ परमेश्वरक न्याय-सिंहासनक सम्मुख ठाढ़ होयबाक अछि, [11] किएक तँ धर्मशास्त्र मे लिखल अछि जे, “प्रभु कहैत छथि जे, हमर जीवनक सपत प्रत्येक व्यक्ति हमरा समक्ष ठेहुनिया देत, आ प्रत्येक व्यक्ति अपना मुँह सँ स्वीकार करत जे हमहीं परमेश्वर छी।” [12] एहि सँ ई स्पष्ट अछि जे अपना सभ मे सँ प्रत्येक गोटे केँ अपन जीवनक लेखा परमेश्वर केँ देबऽ पड़त। [13] तेँ आब सँ अपना सभ एक-दोसर पर दोष लगौनाइ छोड़ि दी। निश्चय कऽ लिअ जे अपन भायक बाट पर रोड़ा नहि अटकायब वा जाल नहि ओछायब। [14] हम प्रभु यीशुक लोक होयबाक कारणेँ जनैत छी, हमरा एहि बातक पूर्ण निश्चय अछि, जे कोनो भोजन अपने मे अशुद्ध नहि अछि। मुदा जँ कोनो व्यक्ति ओकरा अशुद्ध मानैत अछि तँ ओ वस्तु ओकरा लेल अशुद्ध अछि। [15] अहाँ जे वस्तु खाइत छी ताहि कारणेँ जँ अहाँक भाय केँ चोट लगैत छैक तँ अहाँ अपना भायक संग प्रेमपूर्ण आचरण नहि कऽ रहल छी। ओहि भायक लेल मसीह अपन प्राण देलनि, तँ अहाँ अपन भोजन द्वारा ओकर विनाशक कारण नहि बनू। [16] जे बात अहाँ नीक मानैत छी तकरा निन्दाक विषय नहि बनऽ दिअ। [17] कारण, परमेश्वरक राज्य खयनाइ-पिनाइक बात नहि अछि, बल्कि परमेश्वरक पवित्र आत्मा सँ प्राप्त धार्मिकता, शान्ति आ आनन्दक बात अछि। [18] जे केओ एहि तरहेँ मसीहक सेवा करैत अछि, तकरा सँ परमेश्वर प्रसन्न रहैत छथिन आ ओकरा लोको सभ नीक मानैत छैक। [19] तेँ अपना सभ एही प्रयत्न मे रही जे ओहने बात सभ करी जाहि बात सभ सँ मेल-मिलापक वृद्धि होइत अछि आ जाहि द्वारा अपना सभ एक-दोसराक आत्मिक उन्नति कऽ सकब।
Maithili Bible 2010
2010 The Bible Society of India and Wycliffe Bible Translators, Inc