एक विषय पर बाइबिल के श्लोक

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नीक चरित्र: [संयम]
आब हम तेसर बेर अहाँ सभक ओतऽ आबि रहल छी। धर्मशास्‍त्रक नियमक अनुसार, “प्रत्‍येक बातक पुष्‍टि दू वा तीन गवाहक गवाही पर कयल जायत।”
जवानीक अधलाह लालसा सभ सँ दूर भागू और ओहन लोक जे सभ निष्‍कपट हृदय सँ प्रभु सँ प्रार्थना करैत छथि, तिनका सभक संग अहूँ धार्मिकता, विश्‍वास, प्रेम आ शान्‍तिक जीवन बितौनाइ अपन लक्ष्‍य बनाउ।
तेँ ओकरा सभ केँ लिखि पठा देल जाय जे ओ सभ एहि बात सभ सँ बाँचल रहथु—मूर्ति पर चढ़यबाक कारणेँ अशुद्ध भेल वस्‍तु सभ सँ, अनैतिक शारीरिक सम्‍बन्‍ध सँ, कण्‍ठ दबा कऽ मारल ⌞अर्थात्, बिनु खून बहा कऽ मारल⌟ पशुक माँसु सँ आ खूनक खान-पान सँ।
एहि लेल, अहाँ सभ मे जे किछु अहाँ सभक पापी मानवीय स्‍वभाव सँ सम्‍बन्‍ध रखैत अछि, तकरा नष्‍ट कऽ दिअ, अर्थात्, अनैतिक शारीरिक सम्‍बन्‍ध, अपवित्र विचार-व्‍यवहार, शारीरिक काम-वासना, अधलाह बातक लालसा, आ लोभ जे मूर्तिपूजाक बराबरि बात अछि।
अहाँ सभ मे कोनो तरहक अनैतिक शारीरिक सम्‍बन्‍ध नहि होअय, कोनो प्रकारक अपवित्र विचार-व्‍यवहार नहि होअय, कोनो लोभ नहि होअय—एहि सभक चर्चो तक नहि। कारण, ई सभ बात परमेश्‍वरक पवित्र लोकक लेल उचित नहि अछि।
आब देखू, पापी स्‍वभावक काज सभ स्‍पष्‍ट अछि, जेना गलत शारीरिक सम्‍बन्‍ध, अशुद्ध विचार-व्‍यवहार, निर्लज्‍जता,
[18] अनैतिक सम्‍बन्‍ध सँ दूर रहू। आरो सभ पाप जे मनुष्‍य करैत अछि, से शरीर सँ हटल अछि, मुदा जे ककरो संग अनैतिक सम्‍बन्‍ध रखैत अछि से अपना शरीरेक विरुद्ध पाप करैत अछि। [19] की अहाँ सभ नहि जनैत छी जे अहाँ सभक शरीर परमेश्‍वरक पवित्र आत्‍माक मन्‍दिर अछि, जे आत्‍मा अहाँ सभ मे वास करैत छथि आ जे अहाँ सभ केँ परमेश्‍वर सँ प्राप्‍त भेल छथि? अहाँ सभ अपन नहि छी।
मुदा एतेक अनैतिक सम्‍बन्‍ध चलि रहल अछि जे ताहि सँ बचबाक लेल प्रत्‍येक पुरुष केँ अपन स्‍त्री होअय आ प्रत्‍येक स्‍त्री केँ अपन पति।
अहाँ सभ कहियो कोनो एहन परीक्षा मे नहि पड़लहुँ जे मनुष्‍य सभ केँ नहि होइत रहैत अछि। परमेश्‍वर विश्‍वासयोग्‍य छथि। ओ अहाँ सभ केँ एहन परीक्षा मे नहि पड़ऽ देताह जे अहाँ सभक सहनशक्‍ति सँ बाहर होअय। ओ परीक्षाक समय मे तकरा सहबाक साहस दैत अहाँ सभ केँ पार कऽ निकलबाक उपाय सेहो उपलब्‍ध करौताह।
अविश्‍वासी सभक बीच अपन चालि-चलन केँ एतेक नीक बना कऽ राखू जे, जे सभ एखन अहाँ सभ केँ अधलाह काज करऽ वला कहि कऽ निन्‍दा करैत अछि, से सभ अहाँ सभक नीक काज सभ देखि कऽ न्‍यायक दिन मे परमेश्‍वरक स्‍तुति करनि।
सभ केओ विवाह-बन्‍धन केँ आदरक दृष्‍टि सँ देखथि। वैवाहिक सम्‍बन्‍ध दुषित नहि कयल जाय कारण, जे अनैतिक सम्‍बन्‍ध रखैत अछि, चाहे ओ विवाहित होअय वा अविवाहित, परमेश्‍वर तकरा दण्‍ड देताह।
एही तरहेँ सदोम, गमोरा आ तकरा लग-पासक नगर सभ ओही स्‍वर्गदूत सभ जकाँ कुकर्म कयलक आ अप्राकृतिक शारीरिक इच्‍छा सभक पाछाँ दौड़ैत रहल। ओ सभ अनन्‍त आगिक दण्‍ड मे पड़ि कऽ आन लोकक लेल उदाहरण बनल अछि।
धन्‍य अछि ओ सभ जकर हृदय शुद्ध छैक, किएक तँ ओ सभ परमेश्‍वर केँ देखत।
तेँ यौ भाइ लोकनि, हम अहाँ सभ सँ आग्रह करैत छी जे, परमेश्‍वरक अपार दयाक कारणेँ जे ओ अपना सभ पर कयने छथि, अहाँ सभ अपना शरीर केँ जीवित, पवित्र आ परमेश्‍वर द्वारा ग्रहणयोग्‍य बलिदानक रूप मे हुनका अर्पित करू। यैह भेल अहाँ सभक लेल परमेश्‍वरक असली आत्‍मिक आराधना कयनाइ।
अपना सभ उचित आचरण करी, जे दिनक समय मे शोभनीय होइत अछि। अपना सभ भोग-विलास आ नशेबाजी सँ, गलत शारीरिक सम्‍बन्‍ध आ निर्लज्‍जता सँ, झगड़ा आ ईर्ष्‍याक बात सभ सँ दूरे रही।
[3] परमेश्‍वरक इच्‍छा ई छनि जे अहाँ सभ पवित्र बनी। ओ चाहैत छथि जे अहाँ सभ दोसराक संग सभ तरहक अनैतिक शारीरिक सम्‍बन्‍ध सँ दूर रही, [4] अहाँ सभ मे सँ प्रत्‍येक व्‍यक्‍ति अपना शरीर केँ पवित्रता और मर्यादाक संग नियन्‍त्रण मे राखी,
[19] आब देखू, पापी स्‍वभावक काज सभ स्‍पष्‍ट अछि, जेना गलत शारीरिक सम्‍बन्‍ध, अशुद्ध विचार-व्‍यवहार, निर्लज्‍जता, [20] मुरुतक पूजा, जादू-टोना, दुश्‍मनी, लड़ाइ-झगड़ा, ईर्ष्‍या, क्रोध, स्‍वार्थ, मनमोटाब, दलबन्‍दी, [21] द्वेष, मतवालापन आ भोग-विलास आ एहि प्रकारक आन बात सभ। हम अहाँ सभ केँ एहि विषय सभ मे चेतावनी दैत छी, जेना कि पहिनो दऽ चुकल छी जे, एहन काज करऽ वला लोक सभ परमेश्‍वरक राज्‍यक उत्तराधिकारी नहि होयत।
Maithili Bible 2010
2010 The Bible Society of India and Wycliffe Bible Translators, Inc