एक विषय पर बाइबिल के श्लोक

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नीक चरित्र: [संतोष]
[25] आकाशक चिड़ै सभ केँ देखू—ओ सभ ने बाउग करैत अछि, ने कटनी करैत अछि आ ने कोठी मे अन्‍न रखैत अछि, मुदा तैयो अहाँ सभक पिता जे स्‍वर्ग मे छथि से ओकर सभक पालन करैत छथिन। की अहाँ सभ चिड़ै सभ सँ बहुत मूल्‍यवान नहि छी? [26] चिन्‍ता कऽ कऽ अहाँ सभ मे सँ के अपना उमेर केँ एको घड़ी बढ़ा सकैत छी? [27] “वस्‍त्रक लेल अहाँ चिन्‍ता किएक करैत छी? जंगलक फूल सभ केँ देखू जे ओ सभ कोन तरहेँ फुलाइत अछि। ओ सभ ने खटैत अछि, आ ने चर्खा कटैत अछि। [28] हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, राजा सुलेमान सेहो अपन राजसी वस्‍त्र पहिरि कऽ एहि फूल सन सुन्‍दर नहि लगैत छलाह। [29] जँ परमेश्‍वर मैदानक घास, जे आइ अछि आ काल्‍हि आगि मे जराओल जायत, तकरा एहि तरहेँ हरियरी सँ भरल रखैत छथि, तँ ओ अहाँ सभ केँ आओर किएक नहि पहिरौताह-ओढ़ौताह? अहाँ सभ केँ कतेक कम विश्‍वास अछि! [30] “एहि लेल चिन्‍ता नहि करू जे हम सभ की खायब, की पीब वा की पहिरब। [31] कारण, एहि सभ बातक पाछाँ तँ परमेश्‍वर केँ नहि चिन्‍हऽ वला जातिक लोक सभ पड़ल रहैत अछि। अहाँ सभक पिता जे स्‍वर्ग मे छथि से जनैत छथि जे अहाँ सभ केँ एहि बात सभक आवश्‍यकता अछि। [32] बल्‍कि सभ सँ पहिने परमेश्‍वरक राज्‍य पर, आ परमेश्‍वर जाहि प्रकारक धार्मिकता अहाँ सँ चाहैत छथि, ताहि पर मोन लगाउ, तँ ई सभ वस्‍तु सेहो अहाँ केँ देल जायत। [33] “तेँ काल्‍हि की होयत तकर चिन्‍ता नहि करू, किएक तँ काल्‍हि अपन चिन्‍ता अपने कऽ लेत। आजुक लेल तँ अजुके दुःख बहुत अछि।
[23] की ओ सभ मसीहक सेवक अछि? हम पागल जकाँ बजैत छी!—हम ओकरा सभ सँ बढ़ि कऽ छी। हम ओकरा सभ सँ अधिक परिश्रम कयने छी, हम ओकरा सभ सँ बेसी बेर जहल मे पड़लहुँ, नहि जानि हम कतेक बेर पिटल गेलहुँ। कतेको बेर मरैत-मरैत बचलहुँ। [24] यहूदी सभ हमरा पाँच बेर एक-कम-चालिस कोड़ा लगबौलक। [25] हम तीन बेर बेंतक मारि सहलहुँ। एक बेर हमरा मारि देबाक लेल हमरा पर पथरबाहि कयल गेल। तीन बेर एना भेल जे, जाहि पानि जहाज पर हम यात्रा कऽ रहल छलहुँ से ध्‍वस्‍त भऽ गेल। एक बेर दिन-राति भरि हम समुद्र मे बहैत रहलहुँ।
[12] हम विपन्‍नता मे रहनाइ आ सम्‍पन्‍नता मे रहनाइ, दूनू सँ परिचित छी। चाहे तृप्‍त होइ वा भूखल होइ, सम्‍पन्‍न होइ वा अभाव मे होइ, हम कोनो परिस्‍थिति मे सन्‍तुष्‍ट रहनाइ सिखि लेने छी। [13] जे हमरा बल दैत छथि हम तिनका द्वारा सभ किछु कऽ सकैत छी।
अहाँ सभ धनक लोभ सँ मुक्‍त रहू। जे किछु अहाँ लग अछि ताहि सँ सन्‍तुष्‍ट रहू, कारण परमेश्‍वर कहने छथि, “हम तोहर संग कहियो नहि छोड़बह कहियो तोरा नहि त्‍यागबह।”
[6] भक्‍ति सँ अवश्‍य पैघ लाभ होइत अछि, मुदा तकरे, जे अपन स्‍थिति सँ सन्‍तुष्‍ट रहैत अछि। [7] किएक तँ अपना सभ एहि संसार मे ने किछु लऽ कऽ आयल छी आ ने एतऽ सँ किछु लऽ कऽ जायब।
तखन ओ लोक सभ केँ कहलथिन, “सावधान! सभ तरहक लोभ सँ बाँचल रहू! कारण, मनुष्‍यक जीवन ओकर धन-सम्‍पत्ति पर निर्भर नहि रहैत छैक, ओ चाहे कतबो धनिक होअय।”
हम एना बात कऽ कऽ मूर्ख बनि गेल छी मुदा अहीं सभ हमरा ताहि लेल विवश कयने छी। उचित तँ ई छल जे अहीं सभ हमरा योग्‍य ठहरबितहुँ, कारण, हम किछु नहि होइतो ओहि “महा मसीह-दूत सभ” सँ कोनो तरहेँ कम नहि छी।
[10] कारण, धनक लोभ सभ प्रकारक अधलाह बातक जड़ि अछि। एही लोभ मे पड़ि कऽ कतेको लोक सत्‍यक बाट सँ भटकि कऽ अपन विश्‍वास त्‍यागि देने अछि आ अपन मोन केँ विभिन्‍न दुःख-कष्‍ट सँ बेधि लेने अछि। [11] मुदा यौ परमेश्‍वरक भक्‍त, अहाँ एहि सभ बात सँ दूर भागू आ धार्मिकता, भक्‍ति, विश्‍वास, प्रेम, धैर्य आ नम्रताक साधना मे लागू।
Maithili Bible 2010
2010 The Bible Society of India and Wycliffe Bible Translators, Inc