प्रेम मे डर नहि होइत अछि। सिद्ध प्रेम डर केँ भगा दैत अछि, कारण डर दण्ड सँ सम्बन्धित अछि। जे डेराइत अछि, से प्रेम मे सिद्ध नहि भेल अछि।
[22] मुदा परमेश्वरक आत्माक फल ई अछि—प्रेम, आनन्द, शान्ति, सहनशीलता, दयालुता, भलाइ, विश्वस्तता, [23] नम्रता आ आत्मसंयम। एहि गुण सभक विरुद्ध कोनो नियम नहि अछि।
परमेश्वर तँ अपना सभ केँ डरपोकक आत्मा नहि, बल्कि सामर्थ्य, प्रेम आ आत्मसंयमक आत्मा प्रदान कयने छथि।
[6] कोनो बातक चिन्ता-फिकिर नहि करू, बल्कि प्रत्येक परिस्थिति मे परमेश्वर सँ प्रार्थना आ निवेदन करू; अपन विनती धन्यवादक संग हुनका सम्मुख प्रस्तुत करू। [7] तखन परमेश्वरक शान्ति, जकरा मनुष्य केँ बुझि पौनाइ असम्भव अछि, से अहाँ सभक हृदय आ अहाँ सभक बुद्धि केँ मसीह यीशु मे सुरक्षित राखत।
एहि तरहेँ हुनकर यश सम्पूर्ण सीरिया प्रदेश मे पसरि गेलनि। लोक बिमार सभ केँ जे विभिन्न प्रकारक रोग वा कष्ट सँ पीड़ित छल, वा जकरा सभ मे दुष्टात्मा छलैक, मिर्गी सँ पीड़ित छल वा लकवा मारल छल—सभ केँ यीशु लग अनैत छल, और यीशु ओकरा सभ केँ स्वस्थ कऽ दैत छलथिन।
अपना सभ जनैत छी जे परमेश्वर सँ प्रेम कयनिहार लोक, अर्थात् हुनका उद्देश्यक अनुरूप बजाओल गेल लोक सभक लेल प्रत्येक परिस्थिति मे परमेश्वर भलाइ उत्पन्न करैत छथि।
[16] सम्पूर्ण धर्मशास्त्र परमेश्वरक प्रेरणा द्वारा रचल गेल अछि, आ सत्य सिखयबाक लेल, गलत शिक्षा देखार करबाक लेल, जीवन केँ सुधारबाक लेल आ धार्मिकताक अनुसार जीवन कोना बिताओल जाय ताहि बातक शिक्षा देबाक लेल उपयोगी अछि, [17] जाहि सँ धर्मशास्त्रक प्रयोग द्वारा परमेश्वरक भक्त सुयोग्य भऽ हर प्रकारक नीक काज कुशलतापूर्बक कऽ सकय।
अहाँ सभ केँ कनेक काल धरि कष्ट सहन कऽ लेलाक बाद, परमेश्वर, जे सम्पूर्ण कृपाक स्रोत छथि, से अपने अहाँ सभ केँ सिद्ध, दृढ़, बलवन्त आ स्थिर करताह। ओ तँ यीशु मसीह मे अहाँ सभ केँ अपन अनन्त कालीन महिमा मे सहभागी होयबाक लेल बजौने छथि।
हमरा एहि बातक निश्चयता अछि जे, जे परमेश्वर अहाँ सभ मे नीक काज शुरू कयने छथि, से मसीह यीशुक अयबाक दिन धरि ओकरा पूरा सेहो करताह।
तेँ जखन गवाही देबऽ वला सभक एहन विशाल समूह सँ अपना सभ घेरल छी तँ अबैत जाउ, अपना सभ प्रत्येक विघ्न-वाधा उतारि कऽ फेकि दी, आ पापो, जे अपना सभ केँ तुरत्ते ओझरबैत अछि, आ ई दौड़, जाहि मे अपना सभ केँ दौड़बाक अछि, नहि छोड़ि धैर्यपूर्बक अन्त तक दौड़ी।
अहाँ सभ केँ ई सिखाओल गेल जे पूर्ण रूप सँ आत्मा और विचार मे नव लोक बनबाक अछि,
हमर एहि आदेशक लक्ष्य ई अछि जे ओ प्रेम बढ़य जे शुद्ध मोन, निर्दोष विवेक आ निष्कपट विश्वास सँ उत्पन्न होइत अछि।
अन्त मे, यौ भाइ लोकनि, जे बात सभ सत्य अछि, जे बात सभ प्रतिष्ठित अछि, जे बात सभ न्यायसंगत अछि, जे बात सभ पवित्र अछि, जे बात सभ प्रेम करबाक योग्य अछि, जे बात सभ आदरयोग्य अछि, अर्थात्, जे कोनो बात उत्तम वा प्रशंसनीय अछि ताही पर ध्यान लगौने रहू।
दारू पिबि कऽ मतवाला नहि होउ, किएक तँ मतवालापन मात्र दुराचार वला मार्ग पर लऽ जाइत अछि, बल्कि परमेश्वरक आत्मा सँ परिपूर्ण होउ।
Maithili Bible 2010
2010 The Bible Society of India and Wycliffe Bible Translators, Inc