एक विषय पर बाइबिल के श्लोक

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जीवन: [बिहा]
सभ केओ विवाह-बन्‍धन केँ आदरक दृष्‍टि सँ देखथि। वैवाहिक सम्‍बन्‍ध दुषित नहि कयल जाय कारण, जे अनैतिक सम्‍बन्‍ध रखैत अछि, चाहे ओ विवाहित होअय वा अविवाहित, परमेश्‍वर तकरा दण्‍ड देताह।
[4] प्रेम सहनशील आ दयालु होइत अछि। प्रेम डाह नहि करैत अछि, प्रेम अपन बड़ाइ नहि करैत अछि आ ने घमण्‍ड करैत अछि। [5] प्रेम अभद्र व्‍यवहार नहि करैत अछि, ओ स्‍वार्थी नहि अछि, जल्‍दी सँ खौंझाइत नहि अछि आ ने अपराधक हिसाब रखैत अछि। [6] प्रेम अधर्म सँ प्रसन्‍न नहि होइत अछि, बल्‍कि सत्‍य सँ आनन्‍दित होइत अछि। [7] प्रेम सभ बात सहन करैत अछि, सभ स्‍थिति मे विश्‍वास रखैत अछि, सभ स्‍थिति मे आशा रखैत अछि आ सभ स्‍थिति मे लगनशील रहैत अछि।
“शान्‍ति हम अहाँ सभ केँ दऽ जाइत छी। अपन शान्‍ति हम अहाँ सभ केँ दैत छी। जेना संसार दैत अछि, तेना हम नहि दैत छी। अहाँ सभ अपना मोन मे नहि घबड़ाउ, आ ने भयभीत होउ।
अन्‍त मे ई जे, अहाँ सभ गोटे एक मोनक होउ, एक-दोसराक लेल सहानुभूति राखू, एक-दोसर केँ भाइ मानि कऽ प्रेम करू, दयालु आ नम्र बनू।
अहाँ सभ मसीह पर विश्‍वास नहि कयनिहार लोक सभक संग बेमेल जुआ मे नहि जोताउ। अधर्म सँ धार्मिकताक कोन मेल? अन्‍हार सँ इजोतक कोन मेल?
Maithili Bible 2010
2010 The Bible Society of India and Wycliffe Bible Translators, Inc