[13] प्रलोभन मे पड़ल कोनो व्यक्ति ई नहि कहय जे, “परमेश्वर हमरा प्रलोभन मे राखि देने छथि,” कारण, परमेश्वर अधलाह बात सभ सँ ने तँ स्वयं प्रलोभन मे पड़ि सकैत छथि आ ने अनका ककरो प्रलोभन मे रखैत छथि, [14] बल्कि जे प्रलोभन मे पड़ैत अछि से अपने खराब अभिलाषा सँ खिचल आ फँसाओल जाइत अछि। [15] तखन अभिलाषाक गर्भ सँ पापक जन्म होइत अछि और पाप बढ़ि कऽ मृत्यु केँ उत्पन्न करैत अछि। [16] यौ हमर प्रिय भाइ सभ, धोखा नहि खाउ। [17] प्रत्येक नीक आ उत्तम दान जे अछि, से ऊपर सँ अबैत अछि। सूर्य, चन्द्रमा आ तारा सभक रचनिहार, पिता, जे छाया जकाँ नहि बदलैत छथि, तिनके सँ ई दान सभ भेटैत अछि। [18] ओ अपना सभ केँ सत्य वचन द्वारा नव जन्म देबाक निर्णय कयलनि, जाहि सँ हुनकर समस्त सृष्टि मे अपना सभ हुनकर सभ सँ श्रेष्ठ रचना होइयनि ।
ओतऽ पहुँचि कऽ ओ शिष्य सभ केँ कहलथिन, “प्रार्थना करैत रहू जे परीक्षा मे नहि पड़ी।”
ई बात ओ सभ हुनका फँसाबऽ लेल पुछलनि, जाहि सँ हुनका पर दोष लगयबाक आधार भेटनि। यीशु नीचाँ झुकि कऽ अपन आङुर सँ जमीन पर लिखऽ लगलाह।
अहाँ सभ जँ लोकक अपराध क्षमा करब तँ अहाँ सभक पिता जे स्वर्ग मे छथि सेहो अहूँ सभक अपराध क्षमा करताह।
हमरा सभक पाप क्षमा करू, किएक तँ हमहूँ सभ तकरा सभ केँ क्षमा करैत छी जे सभ हमरा सभक संग अपराध करैत अछि। और हमरा सभ केँ पाप मे फँसाबऽ वला बात सँ दूर राखू।”
जे केओ अपन सम्बन्धी सभक आ विशेष कऽ अपने परिवारक सदस्य सभक देख-रेख नहि करैत अछि, से विश्वास त्यागि देने अछि और अविश्वासिओ सँ भ्रष्ट अछि।
मुदा जे केओ धन जमा करऽ चाहैत अछि, से प्रलोभन मे पड़ि जाइत अछि और एहन मूर्खतापूर्ण आ हानिकारक लालसाक जाल मे फँसि जाइत अछि जे लोक सभ केँ पतन आ विनाशक खधिया मे खसा दैत छैक।
Maithili Bible 2010
2010 The Bible Society of India and Wycliffe Bible Translators, Inc