एहि तरहेँ हुनका सभक स्त्री लोकनि सेहो सभ्य आचरणवाली होथि, दोसराक निन्दा-शिकायत करऽ वाली नहि, बल्कि संयमी और सभ बात मे विश्वासयोग्य होथि।
कारण, जहिना पुरुष सँ स्त्रीक सृष्टि भेल तहिना पुरुषक जन्म स्त्री सँ होइत अछि आ सभ बातक मूलस्रोत परमेश्वरे छथि।
मुदा हम जे किछु छी से परमेश्वरक कृपा सँ छी आ हमरा पर जे हुनका द्वारा कृपा कयल गेल से व्यर्थ नहि भेल। हम आन सभ मसीह-दूत सँ बढ़ि कऽ परिश्रम कयलहुँ—ओना तँ हम नहि कयलहुँ, बल्कि ई परमेश्वरक ओहि कृपा द्वारा भेल जे हमरा पर रहल।
धन्य छी अहाँ, कारण, अहाँ विश्वास कयलहुँ जे, प्रभु अहाँ केँ जे बात कहलनि, से पूरा होयत।”
[1] एही तरहेँ, हे स्त्री सभ, अहाँ सभ अपन-अपन पतिक अधीन रहू, जाहि सँ जँ हुनका सभ मे सँ केओ प्रभुक वचन केँ नहि मानैत होथि, तँ अहाँ सभक पवित्र आ श्रद्धापूर्ण चालि-चलन केँ देखि कऽ हुनका सभक हृदय मे परिवर्तन भऽ जानि आ ओ सभ विश्वास मे अबथि—ककरो किछु कहबाक कारणेँ नहि, बल्कि अहाँ सभक व्यवहारक कारणेँ। [2] अहाँ सभक सुन्दरता बाहरी श्रृंगार सँ नहि आबय, जेना केशक गुहनाइ, वा सोनाक गहना-गुड़िया सभ आ बढ़ियाँ-बढ़ियाँ कपड़ा पहिरनाइ सँ,
[22] हे स्त्री सभ, अहाँ सभ जहिना प्रभुक अधीन मे रहैत छी, तहिना अपना-अपना पतिक अधीन मे रहू। [23] कारण, जाहि तरहेँ मसीह अपन शरीरक, अर्थात् मण्डलीक, सिर छथि और ओकर मुक्तिदाता छथि, तहिना पति अपन स्त्रीक उपर, अर्थात् ओकर सिर, अछि।
[3] एही तरहेँ बुढ़ि स्त्रीगण सभ केँ सिखबिऔन जे हुनका सभक चालि-चलन प्रभुक श्रद्धा मानऽ वला लोकक अनुरूप होनि। ओ सभ दोसराक निन्दा-शिकायत नहि करथि आ शराबी नहि होथि, बल्कि नीक बात सिखौनिहारि होथि, [4] जाहि सँ ओ सभ जबान स्त्रीगण सभ केँ सिखा सकथि जे ओ सभ अपना पति आ बच्चा सभ सँ प्रेम करथि, [5] आ विचारशील, पवित्र, कुशल गृहणी आ दयालु होथि, और अपन पतिक अधीन रहथि जाहि सँ हुनका सभक व्यवहारक कारणेँ केओ परमेश्वरक वचनक निन्दा नहि करय।
[9] तहिना स्त्रीगण सभ सेहो अपन ओढ़न-पहिरन वला बात मे मर्यादा आ शालीनताक ध्यान राखथि। अपन श्रृंगार केशक सजावट, सोना वा मोतीक गहना और दामी-दामी वस्त्र सँ नहि, [10] बल्कि भलाइक काज सभ द्वारा करथि। ई बात ओहि स्त्रीगण सभ केँ शोभा दैत छनि जे सभ अपना केँ परमेश्वरक भक्तिनि कहैत छथि। [11] स्त्रीगण सभ मण्डलीक सभा मे शान्त रहि कऽ अधीनताक संग सिखथि। [12] हम एहि बातक अनुमति नहि दैत छी जे स्त्रीगण सभ उपदेश देथि अथवा पुरुष पर हुकुम चलबथि; हुनका सभ केँ चुप रहबाक चाहियनि। [13] कारण, पहिने आदमक सृष्टि भेलनि, आ बाद मे हव्वाक। [14] दोसर बात, आदम नहि ठकयलाह, बल्कि हव्वा ठका कऽ पाप मे पड़ि गेलीह। [15] मुदा तैयो जँ स्त्रीगण सभ शालीनताक संग विश्वास, प्रेम आ पवित्रता मे स्थिर रहतीह, तँ अपन मातृत्वक कर्तव्य पूरा करैत उद्धार पौतीह।
Maithili Bible 2010
2010 The Bible Society of India and Wycliffe Bible Translators, Inc