“हम अहाँ सभ केँ ई सभ बात कहि देने छी जाहि सँ हमरा मे अहाँ सभ केँ शान्ति भेटय। संसार मे अहाँ सभ पर संकट आओत, मुदा साहस राखू! हम संसार पर विजयी भऽ गेल छी।”
तखन हम छोट-पैघ, सभ मरल लोक केँ सिंहासनक सम्मुख ठाढ़ देखलहुँ आ पुस्तक सभ खोलल गेल। तकरबाद एक आओर पुस्तक खोलल गेल जे जीवनक पुस्तक अछि। मरल सभक कयल कर्म, जे पुस्तक सभ मे लिखल गेल छलैक, ताहि अनुसार ओकरा सभक न्याय कयल गेलैक।
अहाँ सभ एहि संसारक अनुरूप आचरण नहि करू, बल्कि परमेश्वर केँ अहाँक सोच-विचार केँ नव बनाबऽ दिऔन आ तहिना अहाँ केँ पूर्ण रूप सँ बदलि देबऽ दिऔन। एहि तरहेँ परमेश्वर अहाँ सभ सँ की चाहैत छथि, अर्थात् हुनका नजरि मे की नीक अछि, की ग्रहणयोग्य अछि आ की सर्वोत्तम अछि, तकरा अहाँ सभ अनुभव सँ जानि जायब।
[28] अपना सभ जनैत छी जे परमेश्वर सँ प्रेम कयनिहार लोक, अर्थात् हुनका उद्देश्यक अनुरूप बजाओल गेल लोक सभक लेल प्रत्येक परिस्थिति मे परमेश्वर भलाइ उत्पन्न करैत छथि। [29] परमेश्वर अपना लोक केँ शुरुए सँ चिन्हैत छलाह, आ ओकरा सभक लेल ओ ई निश्चित कयलनि जे ओ सभ हुनकर पुत्रक समरूप बनय, जाहि सँ यीशु मसीह बहुतो भाय सभक जेठ भाय ठहरथि।
[8] कारण, विश्वास द्वारा, हुनकर कृपे सँ, अहाँ सभक उद्धार भेल अछि—ई अहाँ सभक कोनो पुण्यक फल नहि, बल्कि परमेश्वर द्वारा देल गेल दान अछि। [9] ई ककरो द्वारा कयल कोनो कर्मक परिणाम नहि छैक, जे एहि पर केओ घमण्ड करय।