तेँ अहाँ सभ परमेश्वरक अधीन होउ। शैतानक आक्रमण केँ सामना करिऔक तँ ओ अहाँ सभ लग सँ पड़ायत।
कारण, जे किछु संसार मे छैक, अर्थात् मनुष्यक पापी स्वभावक इच्छा, ओकर आँखिक लालसा और धन-सम्पत्ति पर ओकर घमण्ड, से पिताक दिस सँ नहि, बल्कि संसारक दिस सँ अबैत अछि।
[3] एतबे नहि, बल्कि कष्टक समय सभ मे सेहो आनन्दित होइत छी, किएक तँ अपना सभ जनैत छी जे कष्ट सँ धैर्य उत्पन्न होइत अछि, [4] धैर्य सँ सच्चरित्रता आ सच्चरित्रता सँ आशा उत्पन्न होइत अछि। [5] और ई आशा अपना सभ केँ निराश नहि होमऽ दैत अछि, किएक तँ परमेश्वर अपन पवित्र आत्मा जे अपना सभ केँ देने छथि, तिनका द्वारा अपन प्रेम अपना सभक हृदय मे भरि देने छथि।
[9] की अहाँ सभ ई नहि जनैत छी जे अधर्मी लोक परमेश्वरक राज्य मे प्रवेश करबाक अधिकारी नहि होयत? अपना केँ धोखा नहि दिअ! अनैतिक शारीरिक सम्बन्ध रखनिहार, मूर्तिक पूजा कयनिहार, परस्त्रीगमन कयनिहार, वेश्या सनक काज कयनिहार पुरुष, समलैंगिक सम्बन्ध रखनिहार लोक, [10] चोर, लोभी, पिअक्कड़, गारि पढ़निहार आ धोखेबाज सभ परमेश्वरक राज्य मे प्रवेश करबाक अधिकारी नहि होयत। [11] आ से अहाँ सभ मे सँ किछु गोटे छलहुँ, मुदा अहाँ सभ आब प्रभु यीशु मसीहक नाम सँ आ अपना सभक परमेश्वरक आत्मा द्वारा धोअल गेलहुँ, पवित्र कयल गेलहुँ आ निर्दोष ठहराओल गेलहुँ।
ई कृपा अपना सभ केँ ई सिखबैत अछि जे अधर्म आ सांसारिक अभिलाषा सभ केँ त्यागि कऽ एहि संसार मे विचारवान भऽ कऽ और उचित व्यवहार कऽ कऽ एहन जीवन व्यतीत करी जकरा सँ परमेश्वर प्रसन्न होथि।
[3] एतबे नहि, बल्कि कष्टक समय सभ मे सेहो आनन्दित होइत छी, किएक तँ अपना सभ जनैत छी जे कष्ट सँ धैर्य उत्पन्न होइत अछि, [4] धैर्य सँ सच्चरित्रता आ सच्चरित्रता सँ आशा उत्पन्न होइत अछि। [5] और ई आशा अपना सभ केँ निराश नहि होमऽ दैत अछि, किएक तँ परमेश्वर अपन पवित्र आत्मा जे अपना सभ केँ देने छथि, तिनका द्वारा अपन प्रेम अपना सभक हृदय मे भरि देने छथि।
[15] किएक तँ अपना सभक महापुरोहित एहन नहि छथि जे अपना सभक कमजोरी मे अपना सभक संग सहानुभूति नहि राखि सकथि। ओहो सभ बात मे अपने सभ जकाँ शैतान द्वारा जाँचल गेलाह, मुदा ओ पाप नहि कयलनि। [16] तेँ अपना सभ निर्भयतापूर्बक परमेश्वरक सिंहासन लग, जतऽ कृपा कयल जाइत अछि, ततऽ चलू, जाहि सँ अपना सभ पर दया कयल जाय आ अपना सभ ओ कृपा पाबी जे अपना सभक आवश्यकताक समय मे सहायता करत।
[16] “हँ, परमेश्वर संसार सँ एहन प्रेम कयलनि जे ओ अपन एकमात्र बेटा केँ दऽ देलनि, जाहि सँ जे केओ हुनका पर विश्वास करैत अछि से नाश नहि होअय, बल्कि अनन्त जीवन पाबय। [17] परमेश्वर तँ अपना बेटा केँ संसार मे एहि लेल नहि पठौलनि जे ओ संसार केँ दोषी ठहरबथि, बल्कि एहि लेल जे हुनका द्वारा संसारक उद्धार होअय।
[2] यौ हमर भाइ लोकनि, अहाँ सभ पर जखन अनेक प्रकारक आपत्ति-विपत्ति आबय तँ ओकरा महा आनन्दक बात बुझू। [3] कारण, अहाँ सभ जनैत छी जे अहाँ सभक विश्वासक जाँच भेला सँ धैर्य उत्पन्न होइत अछि।
[15] किएक तँ अपना सभक महापुरोहित एहन नहि छथि जे अपना सभक कमजोरी मे अपना सभक संग सहानुभूति नहि राखि सकथि। ओहो सभ बात मे अपने सभ जकाँ शैतान द्वारा जाँचल गेलाह, मुदा ओ पाप नहि कयलनि। [16] तेँ अपना सभ निर्भयतापूर्बक परमेश्वरक सिंहासन लग, जतऽ कृपा कयल जाइत अछि, ततऽ चलू, जाहि सँ अपना सभ पर दया कयल जाय आ अपना सभ ओ कृपा पाबी जे अपना सभक आवश्यकताक समय मे सहायता करत।
[16] “हँ, परमेश्वर संसार सँ एहन प्रेम कयलनि जे ओ अपन एकमात्र बेटा केँ दऽ देलनि, जाहि सँ जे केओ हुनका पर विश्वास करैत अछि से नाश नहि होअय, बल्कि अनन्त जीवन पाबय। [17] परमेश्वर तँ अपना बेटा केँ संसार मे एहि लेल नहि पठौलनि जे ओ संसार केँ दोषी ठहरबथि, बल्कि एहि लेल जे हुनका द्वारा संसारक उद्धार होअय।
जे हमरा बल दैत छथि हम तिनका द्वारा सभ किछु कऽ सकैत छी।
अहाँ सभ जँ लोकक अपराध क्षमा करब तँ अहाँ सभक पिता जे स्वर्ग मे छथि सेहो अहूँ सभक अपराध क्षमा करताह।
परीक्षा मे नहि पड़ि जाउ ताहि लेल अहाँ सभ जागल रहू आ प्रार्थना करैत रहू। आत्मा तँ तत्पर अछि मुदा शरीर कमजोर।”
परीक्षा मे नहि पड़ि जाउ ताहि लेल अहाँ सभ जागल रहू आ प्रार्थना करैत रहू। आत्मा तँ तत्पर अछि मुदा शरीर कमजोर।”
Maithili Bible 2010
2010 The Bible Society of India and Wycliffe Bible Translators, Inc