चोर, लोभी, पिअक्कड़, गारि पढ़निहार आ धोखेबाज सभ परमेश्वरक राज्य मे प्रवेश करबाक अधिकारी नहि होयत।
कारण, धनक लोभ सभ प्रकारक अधलाह बातक जड़ि अछि। एही लोभ मे पड़ि कऽ कतेको लोक सत्यक बाट सँ भटकि कऽ अपन विश्वास त्यागि देने अछि आ अपन मोन केँ विभिन्न दुःख-कष्ट सँ बेधि लेने अछि।
जे चोरी करैत अछि, से आब चोरी नहि करओ, बल्कि अपना हाथ सँ इमानदारीपूर्बक परिश्रम करओ, जाहि सँ ओ आवश्यकता मे पड़ल लोक सभक मदति कऽ सकय।
चोर खाली चोरी करबाक, जान मारबाक, और नष्ट करबाक उद्देश्य सँ अबैत अछि। मुदा हम एहि लेल आयल छी जे मनुष्य जीवन प्राप्त करय और परिपूर्णता सँ प्राप्त करय।
मुदा जक्कइ ठाढ़ भऽ कऽ प्रभु केँ कहलथिन, “प्रभु, हम अपन आधा सम्पत्ति गरीब सभ केँ दऽ दैत छी, और जँ हम ककरो सँ बइमानी कऽ कऽ किछु लेने छिऐक तँ ओकर चारि गुना फिरता कऽ देबैक।”