हमरा डर अछि जे अहाँ सभक ओतऽ फेर अयला पर कतौ हमर परमेश्वर अहाँ सभ पर जे हमर गर्व अछि तकरा अहाँ सभक सम्मुख चूर-चूर ने करथि आ हम ओहन बहुतो लोक सभक कारणेँ दुखी भऽ जाइ जे सभ पहिने पाप कयने अछि आ अपन कयल अशुद्ध व्यवहार, अनैतिक शारीरिक सम्बन्ध आ भोग-विलासक लेल पश्चात्ताप नहि कयने अछि।
अहाँ सभक मुँह सँ कोनो हानि पहुँचाबऽ वला बात नहि निकलय, बल्कि एहन बात जे दोसराक उन्नतिक लेल होअय और अवसरक अनुरूप होअय, जाहि सँ ओहि सँ सुननिहारक हित होयतैक।
जँ केओ अपना केँ धार्मिक बुझैत अछि मुदा अपन मुँह काबू मे नहि रखैत अछि तँ ओ अपना केँ धोखा दैत अछि और ओकर ओ धर्म बेकार छैक।
यौ भाइ लोकनि, अहाँ सभ एक-दोसराक निन्दा नहि करू। जे केओ अपन भायक निन्दा करैत अछि वा अपना भाय पर दोष लगबैत अछि से धर्म-नियमक निन्दा करैत अछि और धर्म-नियम पर दोष लगबैत अछि। जँ अहाँ धर्म-नियम पर दोष लगबैत छी तँ अहाँ ओकर पालन कयनिहार नहि, बल्कि ओकर न्याय कयनिहार भऽ गेलहुँ।
[13] एतबे नहि, समय बरबाद कयनाइ आ अङने-अङने घुमनाइ ओकरा सभक आदत भऽ जाइत छैक। एहि तरहेँ ओ सभ मात्र आलसिए नहि, बल्कि ओहन-ओहन बात बाजि जे नहि बजबाक चाही, महा बजक्करि, आ दोसराक काज मे टाँग अड़ौनिहारि बनि जाइत अछि। [14] तेँ हम चाहैत छी जे जबान विधवा सभ विवाह करय, सन्तान उत्पन्न करय आ अपन घर-व्यवहार चलाबय, जाहि सँ विरोधी केँ मण्डलीक निन्दा करबाक अवसर नहि भेटैक,
[9] परमेश्वर द्वारा प्रगट कयल सत्य जाहि पर अपना सभक विश्वास आधारित अछि, तकरा ओ सभ शुद्ध आ निर्दोष मोन सँ मानैत होथि। [10] पहिने हुनका सभक जाँच कयल जानि आ हुनका सभक विरोध मे जँ कोनो बात नहि पाओल जाय, तखन मण्डली-सेवकक रूप मे काज करथि। [11] एहि तरहेँ हुनका सभक स्त्री लोकनि सेहो सभ्य आचरणवाली होथि, दोसराक निन्दा-शिकायत करऽ वाली नहि, बल्कि संयमी और सभ बात मे विश्वासयोग्य होथि।
[29] और तेँ ओ सभ हर प्रकारक अधर्म, दुष्टता, लोभ, द्वेष आ ईर्ष्या, हत्या, झगड़ा, छल-कपट आ डाह सँ भरि गेल अछि। ओ सभ चुगली लगौनिहार, निन्दा कयनिहार, परमेश्वर सँ घृणा कयनिहार, जिद्दी, घमण्डी और अहंकारी अछि। ओ सभ अधलाह काज करबाक नव-नव तरीका सभ गढ़ैत रहैत अछि, माय-बाबूक आज्ञाक उल्लंघन करैत अछि, [30] ओ सभ विवेकहीन, विश्वासघाती, प्रेम-शुन्य और निर्दयी भऽ गेल अछि। [31] ओ सभ परमेश्वरक ई उचित फैसला जनैत अछि जे एहन काज कयनिहार मृत्युदण्ड पयबाक जोगरक अछि, तैयो ओ सभ मात्र अपने नहि एहन काज करैत अछि, बल्कि एहन काज कयनिहार लोक सभक समर्थन सेहो करैत अछि। [32] तेँ यौ दोष लगौनिहार, अहाँ जे केओ होइ, निरुत्तर छी, किएक तँ जाहि बात मे अहाँ अनका पर दोष लगबैत छी ताही मे अहाँ अपने केँ दोषी ठहरबैत छी, कारण, जे दोष अहाँ अनका पर लगबैत छी सैह काज अपनो करैत छी।
[2] वृद्ध पुरुष सभ केँ सिखबिऔन जे ओ सभ संयमी, गम्भीर आ विचारवान होथि तथा सही विश्वास, प्रेम आ धैर्य मे स्थिर। [3] एही तरहेँ बुढ़ि स्त्रीगण सभ केँ सिखबिऔन जे हुनका सभक चालि-चलन प्रभुक श्रद्धा मानऽ वला लोकक अनुरूप होनि। ओ सभ दोसराक निन्दा-शिकायत नहि करथि आ शराबी नहि होथि, बल्कि नीक बात सिखौनिहारि होथि, [4] जाहि सँ ओ सभ जबान स्त्रीगण सभ केँ सिखा सकथि जे ओ सभ अपना पति आ बच्चा सभ सँ प्रेम करथि, [5] आ विचारशील, पवित्र, कुशल गृहणी आ दयालु होथि, और अपन पतिक अधीन रहथि जाहि सँ हुनका सभक व्यवहारक कारणेँ केओ परमेश्वरक वचनक निन्दा नहि करय।
[28] एहि तरहेँ ओ सभ जखन परमेश्वरक सत्य-ज्ञान केँ रखनाइ महत्वपूर्ण नहि बुझलक तँ परमेश्वर ओकरा सभ केँ भ्रष्ट मोनक वश मे छोड़ि देलथिन जाहि सँ ओ सभ अनुचित काज करय, [29] और तेँ ओ सभ हर प्रकारक अधर्म, दुष्टता, लोभ, द्वेष आ ईर्ष्या, हत्या, झगड़ा, छल-कपट आ डाह सँ भरि गेल अछि। ओ सभ चुगली लगौनिहार, निन्दा कयनिहार, परमेश्वर सँ घृणा कयनिहार, जिद्दी, घमण्डी और अहंकारी अछि। ओ सभ अधलाह काज करबाक नव-नव तरीका सभ गढ़ैत रहैत अछि, माय-बाबूक आज्ञाक उल्लंघन करैत अछि, [30] ओ सभ विवेकहीन, विश्वासघाती, प्रेम-शुन्य और निर्दयी भऽ गेल अछि। [31] ओ सभ परमेश्वरक ई उचित फैसला जनैत अछि जे एहन काज कयनिहार मृत्युदण्ड पयबाक जोगरक अछि, तैयो ओ सभ मात्र अपने नहि एहन काज करैत अछि, बल्कि एहन काज कयनिहार लोक सभक समर्थन सेहो करैत अछि। [32] तेँ यौ दोष लगौनिहार, अहाँ जे केओ होइ, निरुत्तर छी, किएक तँ जाहि बात मे अहाँ अनका पर दोष लगबैत छी ताही मे अहाँ अपने केँ दोषी ठहरबैत छी, कारण, जे दोष अहाँ अनका पर लगबैत छी सैह काज अपनो करैत छी।
Maithili Bible 2010
2010 The Bible Society of India and Wycliffe Bible Translators, Inc